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इबोला के खतरे को देखते हुए कनाडा ने लागू किए अस्थायी सीमा प्रतिबंध

कनाडा सरकार ने इबोला वायरस के देश में प्रवेश और उसके फैलाव के खतरे को कम करने के लिए अस्थायी सीमा संबंधी उपायों की एक श्रृंखला की घोषणा की है। 

पब्लिक हेल्थ एजेंसी ऑफ कनाडा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इबोला के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में प्रकोप और युगांडा व साउथ सूडान में बढ़ते खतरे के मद्देनज़र कनाडा इन देशों के निवासियों के लिए आव्रजन दस्तावेज 90 दिनों के लिए निलंबित करेगा। यह निर्णय बुधवार रात 11:59 बजे (ईस्टर्न टाइम) से प्रभावी होगा।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन तीन देशों के वे नागरिक जिनके पास पहले से स्वीकृत अस्थायी निवासी वीजा, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन या स्थायी निवासी वीजा है, उन्हें कनाडा की यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी।

इसके अलावा, इन देशों के निवासियों द्वारा किए गए नए आवेदनों की प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी।

एक अतिरिक्त उपाय के तहत 30 मई की रात 11:59 बजे (ईस्टर्न टाइम) से 29 अगस्त तक, कनाडा उन कनाडाई नागरिकों, स्थायी निवासियों, इंडियन एक्ट के तहत पंजीकृत व्यक्तियों और विदेशी नागरिकों के लिए अनिवार्य 21-दिवसीय क्वारंटीन लागू करेगा, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा की हो और जिनमें बीमारी के लक्षण न हों। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन यात्रियों में लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें क्वारंटीन एक्ट के तहत आगे की जांच के लिए अस्पताल में अलग रखा जाएगा। 

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कनाडा सरकार ने जोर देकर कहा कि कनाडा में लोगों के लिए जोखिम अभी कम है और उत्तर अमेरिका में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, बीमारी की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति में हो रहे बदलावों, जिनमें आगामी फीफा वर्ल्ड कप भी शामिल है, को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है, जो मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है।

यह वायरस जंगली जानवरों- जैसे फल खाने वाले चमगादड़, साही और गैर-मानव प्राइमेट्स से इंसानों में फैलता है। इसके बाद संक्रमित लोगों के खून, शारीरिक स्राव, अंगों या अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क तथा इनसे दूषित वस्तुओं (जैसे बिस्तर व कपड़े) के माध्यम से यह बीमारी इंसानों में फैलती है।

इबोला की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत होती है। हालांकि पिछले प्रकोपों में यह दर 25 से 90 प्रतिशत तक रही है।

इबोला के शुरुआती प्रकोप मध्य अफ्रीका के दूरदराज के गांवों में, उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के पास हुए थे। वर्ष 2014–2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला प्रकोप 1976 में वायरस की खोज के बाद से सबसे बड़ा और सबसे जटिल प्रकोप माना गया। इस दौरान पहले के सभी प्रकोपों की तुलना में अधिक मामले और मौतें दर्ज की गईं। यह संक्रमण गिनी से शुरू होकर जमीनी सीमाओं के जरिए सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था।

Pic Credit : ANI

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By Naya India

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