मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने भारत में आरएसएस के योगदान की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए जरूरतों को पहचानने पर ध्यान देने की बात भी कही। आईएएनएस से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि हम आतंकवादी संगठनों को इजरायल में रहने वाले आम लोगों को धमकाने की इजाजत नहीं दे सकते।
मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने आईएएनएस से कहा, “यह सिर्फ इजरायल के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लोगों के लिए भी जरूरी है कि हम आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत को पहचानें। हम आतंकवादी संगठनों को इजरायल में रहने वाले आम लोगों को धमकाने की इजाजत नहीं दे सकते। उम्मीद है, अब जब दूसरे देश इस बात पर सहमत हैं कि हमास के हथियार खत्म कर देने चाहिए, तो हम दूसरे चरण की ओर बढ़ सकते हैं जिसका ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था।
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यानिव रेवाच ने कहा मुझे भारत में इजरायल का प्रतिनिधि होने पर बहुत गर्व है, खासकर ऐसे समय में जब हमारे दोनों देशों के बीच रिश्ते बहुत मजबूत हैं और हर दिन और मजबूत होते जा रहे हैं। हाल ही में कई इजरायली मंत्रियों ने भारत का दौरा किया है, जिनमें विदेश, ट्रांसपोर्ट, वाणिज्य और वित्त मंत्री शामिल हैं।
उन्होंने कहा हमें स्टूडेंट्स के साथ एक हैकाथॉन का उद्घाटन करने के लिए नागपुर बुलाया गया था। मेरे लिए यंग जेनरेशन से जुड़ना और पानी से जुड़ी समस्याओं को हल करने के तरीके खोजना वाकई दिलचस्प था। नागपुर में रहते हुए, मुझे यह भी लगा कि आरएसएस हेडक्वार्टर जाना जरूरी है, क्योंकि इसकी अहमियत है।
आरएसएस को लेकर यानिव रेवाच ने कहा यह देखना वाकई दिलचस्प था कि वे युवा वर्गों के साथ इतने करीब से कैसे काम करते हैं; यह सच में कमाल का था। जब शिक्षा, नेतृत्व, मूल्यों और खासकर समुदाय की बात आती है, तो वे लोगों से जुड़ने और सभी को जोड़ने की सच्ची कोशिश करते हैं। मुझे लगता है कि इजरायल के साथ कई समानताएं हैं: जब इजरायल बना, तो यहूदी आंदोलनों ने वैल्यूज डालने, युवाओं को साथ लाने और उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ने का काम किया
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