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अनाज का संकट न खड़ा हो जाए

आने वाले दिनों में भी भारत पर ही सबसे ज्यादा असर होने वाला है। वैश्विक स्थितियों से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत होगा। ईंधन से लेकर खाद्यान्न तक की आपूर्ति प्रभावित होगी। पिछले दिनों विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क के एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम में चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले महीनों में दुनिया को एक ‘बड़े वैश्विक खाद्य संकट’ का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इस संकट के लिए ‘4 एफ’ यानी फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर औरर फाइनेंस यानी भोजन, ईंधन, अर्वरक और वित्त के मोर्चे पर चल रहे वैश्विक तनाव को जिम्मेदार ठहराया है।

जयशंकर ने कहा कि रूस व यूक्रेन युद्ध और ईरान व अमेरिका युद्ध के कारण ब्लैक सी और होर्मुज की खाड़ी से वैश्विक आपूर्ति शृंखला बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इस वजह से अनाज निर्यातक देशों से शिपमेंट समय पर नहीं निकल पा रही है। इन्हीं कारणों से उर्वरक की आपूर्ति भी प्रभावित है। ध्यान रहे रूस और पश्चिम एशिया सबसे बड़े रासायनिक खाद्य के उत्पाद हैं। युद्ध की वजह से उनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और दूसरे आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने से शिपमेंट में परेशानी है। इसकी वजह से वैश्विक स्तर पर रासायनिक खाद की कीमतें बहुत बढ़ी हैं। करीब 80 फीसदी तक।

इन वैश्विक हालातों के अलावा मौसम का मिजाज भी खाद्यान्न संकट को बढ़ाने वाला है। सुपर अल नीनो के कारण दुनिया भर के मौसम पर असर हुआ है। इससे आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया में कृषि पैदावार कम होने की आशंका है। सो, मौसम और भूराजनीतिक स्थितियों का बड़ा असर भारत के ऊपर होगा। मौसम की मार और उर्वरक की महंगाई व अनुपलब्धता के कारण भारत में भी खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे भारत की खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी। रासायनिक खाद और खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा असर भारत के खजाने पर भी पड़ेगा क्योंकि इससे उर्वरक व अनाज दोनों की सब्सिडी का बिल बढ़ेगा।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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