प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, उनके सत्ता भोग के 25 साला कार्यकाल को मनाने की रूपरेखा भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी महासचिव व अन्य पदाधिकारियों ने मनाई। उसके बाद से जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां सरकारी स्तर पर और जहां सरकार नहीं है वहां संगठन के स्तर पर इस कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारियां शुरू हुई हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के सभी लाभार्थियों को दो दो दीये उनके घरों तक पहुंचाए जाएंगे। हरियाणा में लाभार्थी परिवारों की संख्या करीब 40 लाख है। यानी 80 लाख दीये हरियाणा सरकार बंटवाएगी। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार भी 36 लाख दीये बंटवा रही है। लोगों के घरों के आगे और कई सामुदायिक भवनों, अस्पतालों आदि पर भी दीया जलाने की तैयारी है।
केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या करोड़ों में है। सबको अलग अलग किस्म का लाभ मिला है। किसी को शौचालय बनाने के पैसे मिले हैं, किसी को प्रधानमंत्री आवास योजना का पैसा मिला है, किसी को किसान सम्मान निधि के पैसे मिले हैं, किसी को पांच किलो अनाज मिल रहा है तो किसी का आयुष्मान योजना के तहत इलाज हुआ है तो किसी को भाजपा शासित राज्यों में चलाई जा रही महिला सम्मान योजनाओं का लाभ मिला है। इस तरह पांच सौ रुपए महीने से लेकर कुछ हजार रुपए तक एकमुश्त की रकम करोड़ों परिवारों को मिली है। भाजपा का मानना है कि इन सबको मिल कर प्रधानमंत्री मोदी को आशीर्वाद देना चाहिए।
इसलिए इस कार्यक्रम का नाम ‘आशीर्वाद का दीया’ रखा गया है। लेकिन असल में भाजपा चाहती है कि लाभार्थी आभार का दीया जलाएं। वे आभार मानें कि प्रधानमंत्री के कारण उनको इतना लाभ मिल रहा है। भाजपा के कई नेता खुलेआम यह बात कह चुके हैं। वैसे भी राशन के थैलों से लेकर हर जगह लाभार्थी को मोदी की तस्वीर दिखाई जाती है। इसलिए निश्चित रूप से उनको आभार मानना चाहिए कि मोदी की कृपा से पांच सौ, हजार रुपए मिल रहे हैं।
लेकिन प्रधानमंत्री की योजनाओं के असली लाभार्थियों को भी तो दीये जलाने चाहिए? प्रधानमंत्री की नीतियों के कारण जिनको लाखों करोड़ रुपए की कमाई हुई है या जिनके हजारों करोड़ रुपए के कर्ज सस्ते में या मुफ्त में निपटे हैं तो उनको भी दीया जलाना चाहिए? दीया क्या जलाना चाहिए उनको तो दिवाली मनानी चाहिए। सोचें, पिछले दिनों खबर आई थी कि जी समूह के सुभाष चंद्र ने 22 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की गारंटी दी थी लेकिन कंपनियों ने कर्ज नहीं चुकाया और सुभाष चंद्र साढ़े छह करोड़ रुपए के सेटलमेंट में छूट रहे थे। हालांकि मीडिया में खबर आने के बाद इसके खिलाफ बहुत माहौल बना तो एनसीएलटी ने अपने ही फैसले पर रोक लगा दी। लेकिन यह एक अपवाद है। नरेंद्र मोदी ने सरकार में आने के बाद इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड यानी आईबीसी बनाई और इसे लागू करने के लिए एनसीएलटी और एनसीएलएटी का गठन किया गया। एक अनुमान के मुताबिक इस कानून के तहत लगभग 14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बट्टेखाते में डाला गया है। सोचें, जिनको इसका फायदा हुआ है क्या उनको प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिवाली नहीं मनानी चाहिए?
ज्यादा दिन नहीं बीते जब खबर आई थी कि जेपी समूह का 57 हजार करोंड़ रुपए का कर्ज करीब 14 हजार करोड़ रुपए में अडानी समूह ने निपटाया और जेपी समूह की सारी संपत्ति उनकी हो गई। जेपी समूह के रियल इस्टेट के प्रोजेक्ट्स सहित उनके थर्मल पावर संयंत्र और दूसरी सारी संपत्तियां अडानी समूह की हो गईं। देश के बैंकों के करीब 44 हजार करोड़ रुपए बट्टेखाते में गए। अनिल अंबानी की कंपनी ऐसे ही मुकेश अंबानी को गई या रूचि सोया जैसी कंपनी बाबा रामदेव को गई। आईएलएंडएफएस से लेकर दर्जनों कंपनियां लाखों करोड़ रुपए के कर्ज लेकर दिवालिया हुईं और सारे मामले आईबीसी के तहत एनसीएलटी या एनसीएलएटी में निपटाए गए। सब कंपनियां चुनिंदा कारोबारियों के हाथों में चली गईं। असल में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीया जलाने का काम तो इन कंपनियों के मालिकों को करना चाहिए।
कथित हिंदू राष्ट्र का यह कैसा अजूबा होगा कि पांच सौ या हजार रुपए का लाभ लेने वाले तो ‘आशीर्वाद की दीया’ जलाएं लेकिन जिनको लाखों करोड़ रुपए की कमाई हुई है वे कुछ नहीं करें! देश के चुनिंदा कारोबारियों का पिछले 12 वर्षों में अलग अलग सेक्टर में एकाधिकार बना। विमानन से लेकर संचार और बंदरगाह से लेकर एनर्जी सेक्टर तक में चुनिंदा कंपनियों का एकाधिकार स्थापित हुआ है। ये असली लाभार्थी हैं, जिनको प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर न सिर्फ दीया जलाना चाहिए, बल्कि दिवाली मनानी चाहिए और उनका आभार मानना चाहिए।
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