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श्रुति व्यास

उदास क्रिसमस

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इस साल क्रिसमस पर उदासी दिखी। जहां यीशू का जन्म हुआ, और जहां क्रिसमस का समयआनंद औरजश्न था, उस बेथलेहम में क्रिसमस का आनंद गायब था। बल्कि यीशू का जो जन्मोत्सव बेथलेहम में मनाया गया, उसमें फिलिस्तीनी केफिए (चारखानेदार साफा) में लिपटे हुए शिशु यीशू को मलबे के ढेर पर पड़ा दिखाया गया। गाजामें चल रहे युद्ध के कारण पश्चिमी किनारे में समारोह बहुत छोटे स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। किसी भोज का आयोजन नहीं किया गया और कोई तीर्थयात्री नहीं है। बेथलेहम वीरान है। इस साल क्रिसमस के समारोह रद्द कर दिए गए हैं। मेंजर स्केवयर पर हजारों पर्यटक और तीर्थयात्री जहां जमा होते थे वे इस साल नजर नहीं आ रहे हैं।

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर रेवरेंड डॉ। मुंथेर इसाक ने इवानजीलीकल लुथेरिएन क्रिसमस चर्च के मंच से अपना क्रिसमस उपदेश देते हुए कहा कि “यदि यीशू आज जन्म लेते तो वे गाजा में मलबे के ढेर के नीचे पैदा होते”।इसाक 23 दिसंबर को पश्चिमी किनारे में “मलबे में यीशू”प्रार्थना को संबोधित कर रहे थे।

गाजा में साल-दर-साल और छोटे हो जा रहे ईसाई समुदाय को 7 अक्टूबर के बाद से बहुत तकलीफें झेलनी पड़ी हैं। गाजा के सबसे पुराने सेंट प्रोफिरिअस चर्च पर हुए एक हवाई हमले में चर्च को नुकसान पहुंचा और कम से कम 16 लोग मारे गए। एक ईसाई मां-बेटी, जो एक चर्च के परिसर में शरण लिए हुईं थीं, की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने के बाद पोप फ्रांसिस ने इजराइल द्वारा गाजा में किए गए कृत्यों को ‘आतंकवाद’कहा। नेटीविटी चर्च के इजाह थलजिया ने बीबीसी को बताया कि शहर पहले की तुलना में बहुत वीरान नजर आ रहा है। यहां तक कि कोविड-19 के दौरान भी बेथलेहम इतना उदास और शांत नहीं था। बेथलेहम में यीशू के जन्म की जो झांकी एक प्रभावी संदेश देने के लिए बनाई गई है – जो यीशू के परिवार की दुदर्शा दर्शाती है – और अब फिलिस्तीनियों की।

पादरी ने पश्चिमी देशों की भी आलोचना की जिन्हें वे गाजा में की गई इजरायली बमबारी में भागी मानते हैं।इसके चलते 20 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं और 20,000 मारे गए हैं।उन्होंने इसे ‘नरसंहार’बताया। उन्होंने पश्चिम को पाखंडी बताते हुए कहा “आपकी मानवीयता में कुछ न कुछ कमी है”।उन्होंने आगे कहा ‘‘गाजा आज दुनिया की नैतिकता का मानक बन गया है”।

येरूशलम में भी बड़े चर्चों के प्रमुखों ने क्रिसमस के जश्न रद्द कर दिए। पुराने शहर का प्राचीन गलियारे, जहां सामान्यतः साल भर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की भीड़ रहती है, इस अक्टूबर से सूने पड़े हैं। इजराइल और फिलिस्तीन में ईसाईयों के नेता हाल के घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से बचते हैं लेकिन इस वर्ष चर्च के नेताओं कीअपने शोक की मुखर अभिव्यक्ति और युद्ध की खुलकर निंदा से पता चलता है कि कई चर्चों में कितना गहन आक्रोश महसूस किया जा रहा है।

बेथलेहम से आ रही खबरों को पढना और वहां की तस्वीरों को देखना वाकई हृदयविदारक है। सामान्यतः जिस समय वहांख़ुशी, दयालुता और प्रेम दर्शाने वाली घंटियां बजती होती थीं, इस साल वे गायब हैं। बेथलेहम में सारे समारोह स्थगित कर दिए गए हैं, और इस क्षेत्र में हमास-नियंत्रित गाजा पट्टी के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार मारे गए 20,000 से अधिक फिलिस्तीनियों के लिए शोक मनाया जा रहा है।मगर यह भी सच है कि बेथलेहम का माहौल हमेशा से चुप्पी और तनाव से भरा रहा है। हालांकि छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक वहां आते हैं लेकिन येरूशलम सहित पश्चिमी किनारे में ईसाईयों के लिए हालात तेजी से खराब होते जा रहे हैं। इस पवित्र भूमि पर रहने वाले ईसाईयों की संख्या बहुत कम हो गई है। सौ साल पहले, उनकी आबादी येरूशलम की कुल आबादी की एक-चौथाई थी और अब वे दो प्रतिशत से भी कम हैं। इजराइल द्वारा बनाई गई विभाजक दीवार और कई बस्तियों के कारण, बेथलेहम अलग-थलग पड़ गया है। जब इस्लामिक संगठन हमास ने 2007 में इस पट्टी पर नियंत्रण कायम किया, तब 3,000 ईसाईयों का वहां के निवासियों के रूप में पंजीयन हुआ था। और इस घिरे हुए क्षेत्र में पहले से ही बहुत छोटा ईसाई समुदाय इस नए युद्ध का नतीजा भुगत रहा है।

यह पवित्र भूमि इस साल दुखों में डूबी है, विलाप कर रही है और अपने प्रियजनों को याद कर रही है। लेकिन जंग जारी है, जिसमें इस टकराव के सबसे अधिक घातक दिनों में से एक में पिछले 24 घंटों में 166 फिलिस्तीनी और 13 इजरायली सैनिक मारे गए हैं।(कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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