nayaindia Israel hamas war पश्चिम एसिया धूं-धूंकर जलेगा?
श्रुति व्यास

पश्चिम एशिया धूं-धूंकर जलेगा?

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मामला भड़का सात अक्टूबर को। अचानक वह हुआ जिसकी कल्पना नहीं सालों की खुन्नस, उत्पीड़न, आतंक और भय की एक दिन इजराइल को कीमत अदा करनी पड़ी। तब सेपश्चिम एसिया की हवा में बारूद की गंध घुली हुई है। हमास के आंतकी हमले के बाद से इजराइल बड़े पैमाने पर लगातार बदले की कार्यवाही कर रहा है। नतीजतन पूरे पश्चिम एसिया में अशांति है।और विश्लेषक, चिंतक, कूटनीतिज्ञ, सैन्य अधिकारी सभी भविष्यवाणी कर रहे हैं कि आगे यह क्षेत्र और धूं-धूं करके जलेगा। गाजा पर ताबड़तोड़ हमले करके इजराइल ने उसे राख के ढ़ेर में बदल दिया है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार वहां 22,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और संयुक्त राष्ट्रसंघ के अनुसार 19 लाख लोग विस्थापित हैं। मंगलवार को लेबनान के एक शीर्षस्थ नेता की हत्या हुई। और अगले ही दिन ईरान में हुए दो रहस्यपूर्ण विस्फोटों में कई लोग मारे गए। इससे पश्चिम एसिया एक क्षेत्रीय युद्ध के कगार पर पहुंचा है जिसमें सभी पक्ष घसीटते हुए हैं। सभी देशों पर खतरा मंडरा रहा है।

पिछले तीन महीनों से हिज़बुल्लाह और इजराइल एक दूसरे पर ज्यादा और ज्यादा मिसाईलें दाग रहे हैं, हवाई हमले कर रहे हैं और तोप के गोले छोड़ रहे हैं। लेकिन दोनों पक्षों ने अपनी कार्यवाही को एक सीमा के आगे नहीं बढ़ने दिया है। लेकिन 7 अक्टूबर के बाद से इजरायली जनता और नेताओं की यह धारणा बलवती होती जा रही है कि हिज़बुल्लाह द्वारा उत्पन्न खतरे से निपटना ही होगा। इस बीच हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्ला ने चेतावनी दी थी कि लेबनान की भूमि पर हुए किसी भी कत्ल का ‘मुंहतोड़ जवाब’ दिया जाएगा। हमास के नेता की हत्या के बाद बुधवार को उन्होंने कहा कि हिज़बुल्लाह ‘चुप नहीं बैठेगा’।हालांकि यह माना जा रहा है कि हिज़बुल्लाह तुरंत बदले की कोई बड़ी कार्यवाही नहीं करेगा और इजराइल के अधिकांश सैन्य संसाधनों के गाजा पर हमलों में खलास होने और नतीजे में पश्चिम एसिया कीअरब जनता में व्यापक आक्रोश उत्पन्न होने का इंतजार करेगा। वह अपने हथियारों के भंडार सुरक्षित रखना चाहेगा और लड़ाई का बोझ हमास और यमन के हूती लड़ाकों पर छोड़ देगा।

लेकिन ईरान में हुए विस्फोटों के कुछ ही घंटों बाद अमरीका और उसके 12 मित्र राष्ट्रों ने यमन के हूतियों को एक लिखित चेतावनी जारी की है। हूति लगभग प्रतिदिन मिसाइलों, ड्रोनों और नौकाओं से व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहे हैं। अब तक अमेरिका हूतियों पर जवाबी हमला करने से कतराता रहा है, बहुत हद तक इसलिए क्योंकि वह यमन में चल रहे गृहयुद्ध में हुए एक नाजुक संघर्ष विराम को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहता। लेकिन अब बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि उनका धैर्य समाप्त हो रहा है। रविवार को अमेरिकी सेना ने कहा कि जब वे एक कंटेनर जहाज की मदद कर रहे थे, तब उन पर हूती लड़ाकों ने हमला किया। बाद में हैलीकाप्टरों के जरिए किए गए हवाई हमले में ये लड़ाके मारे गए। ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका और ब्रिटेन यमन में हूतियों के अड्डों पर हमला करने पर विचार कर रहे हैं।

ईरान के पूर्व सैन्य जनरल कासिम सुलेमानी की कब्र पर ईरान के केरमान में हुए विस्फोटों ने स्थिति को और बिगाड़ा है। ईरान ने बिना देरी किए इन विस्फोटों के लिए इजराइल को जिम्मेदार बता दिया है। वहीं यूरोपीय और अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि इनमें इजराइल का हाथ है। अब तक ईरान के खिलाफ इजरायली कार्यवाहियां सीमित लक्ष्य हासिल करने के लिए की गईं हैं – चाहे वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुख्य आर्किटेक्ट की हत्या हो या उसके परमाणु और मिसाइल अड्डों को तहस-नहस करना हो।ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को जारी एक वक्तव्य में हमले के लिए ‘देश के दुष्ट और आपराधिक शत्रुओं’ को जिम्मेदार ठहराया लेकिन उन्होंने किसी संगठन या देश का नाम नहीं लिया। खामेनेई ने कसम खाते हुए कहा कि ईरान के शत्रुओं को यह मालूम होना चाहिए कि उन्हें “इस त्रासदी की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी”।

इस घटना के लिए चाहे जो भी जिम्मेदार हो, यह अत्यंत नाज़ुक हालातों में गलत फैसलों और बेजा हथकंडों से  होने वाले वाले खतरों को रेखांकित करता है।पश्चिम एसिया में सभी पक्ष अपने-अपने एजेंडे पर अमल करने में जुटे है। हर बीतते दिन के साथ एक क्षेत्र-व्यापी युद्ध के छिड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीरबदुल्लाह ने एक भयावह भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था गाजा पर इजराइल के जवाबी हमले का अर्थ है ‘‘युद्ध के क्षेत्र का विस्तार”।और मध्य पूर्व में युद्ध के और तेज होते जाने से ऐसा लगता है कि अमीरबदुल्लाह एक अच्छे ज्योतिषी हैं। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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