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वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

अपन तो कहेंगे
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वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?
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नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या हम भय में नहीं जी रहे हैं और इसकी तस्दीक भारत का रक्षा बजट में बढ़ोतरी से लेकर पश्चिमी देशों के साथ ट्रेड डील करना यानी सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ साथ आर्थिकी को और खोलना..ऐसे में सवाल यही कि ऐसा क्यों…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है…

वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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