गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की बेटी अनार पटेल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की चर्चा कम ही होती है। हालांकि ऐसा नहीं है कि लोग उनको जानते नहीं हैं। अभी तक बैकग्राउंड पर्सनैलिटी के तौर पर उनकी चर्चा होती है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि वे राजनीति में कुछ अहम भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं। हो सकता है कि इसमें उनकी मां आनंदी बेन की भी सहमति और समर्थन हो। वैसे भी गुजरात में अब नई पीढ़ी को भाजपा की राजनीति संभालनी है। कहा जा रहा है कि भूपेंद्र पटेल के बाद हर्ष सांघवी को तैयार किया जा रहा है। लेकिन क्या अनार पटेल आने वाले दिनों में उनको चुनौती दे सकती हैं? पिछले महीने उनको गुजरात के सबसे मजबूत लेउवा पटेल समुदाय की शक्तिशाली संस्था खोडलधाम ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है।
ध्यान रहे गुजरात में पटेल समुदाय सबसे ताकतवर और राजनीतिक रूप से चुनाव को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला समुदाय है। लेकिन नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से इस समुदाय की राजनीतिक ताकत घटी है। अब भी भले भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री हैं लेकिन राजनीति की कमान गैर पटेल यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथ में ही है। माना जा रहा है कि अब पटेल राजनीति में अनार पटेल एक बड़े नाम के तौर पर स्थापित हो रही हैं। गौरतलब है कि खोडलधाम ट्रस्ट के प्रमुख नरेश पटेल हैं और उन्होंने जब अनार पटेल को अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की तो कहा कि कई बार परंपरा तोड़नी पड़ती है। जाहिर है संगठन ने परंपरा तोड़ी है तो उसके पीछे कोई रणनीति है। यह भी कहा जा रहा है कि लेउवा पटेल समुदाय के युवाओं को आगे लाने और सक्रिय करने में अनार पटेल की भूमिका होगी। वैसे उन्होंने ग्रामश्री और क्राफ्ट्सरूट जैसे प्लेटफॉर्म्स की स्थापना की थी और महिलाओं के लिए काम कर रही थीं। अब महिलाओं के साथ साथ पटेल युवाओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। खोडलधाम ट्रस्ट की प्रेसिडेंट के तौर पर वे गुजरात की राजनीति में एक मजबूत पावर सेंटर बन सकती हैं।


