दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए लोधी इस्टेट का नया मकान शुभ नहीं साबित हुआ है। जिस दिन वे नए मकान में शिफ्ट हुए उसी दिन सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ कर भाजपा के साथ चले गए। अब केजरीवाल के सामने अपनी पार्टी को एकजुट रखने का संकट है। पंजाब में आप के 92 विधायक हैं और मीडिया ने खबर चलानी शुरू कर दी है कि 63 विधायक राघव चड्ढा के संपर्क में हैं। हालांकि वास्तविकता ऐसा नहीं दिख रही है। 40 से 45 विधायक जरूर ऐसे हैं, जिनकी टिकट राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने तय की थी। लेकिन ये लोग भी पार्टी छोड़ेंगे इसमें संदेह है।
इसका कारण यह है कि पंजाब में भाजपा का कोई आधार नहीं है। आम आदमी पार्टी के विधायकों को पता है कि अगर वे आप छोड़ कर भाजपा में जाते हैं तो अगले साल के चुनाव में जीत की गारंटी नहीं रहेगी। अगर पार्टी तोड़ कर नई पार्टी बनाई जाती है तो उस नई पार्टी का भविष्य क्या होगा यह भी अनिश्चित है। राघव चड्ढा या संदीप पाठक इन विधायकों को चुनाव नहीं जीता सकते हैं। इसलिए चुनाव नजदीक आने पर कुछ विधायक पार्टी छोड़ें यह बात तो समझ में आती है लेकिन अभी राज्यसभा सांसदों की तरह आप के विधाय़क पार्टी छोड़ देंगे यह संभव नहीं लगता है। फिर भी केजरीवाल अपने बड़े नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं ताकि विधायकों को एकजुटता का मैसेज दिया जा सके।
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