बिहार प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और नीतीश कुमार की पिछली कई सरकारों में मंत्री रहे मंगल पांडेय को इस बार सरकार में जगह नहीं मिली है। भाजपा कोटे से मंत्री बनने वाले लोगों में उनका नाम सबसे पक्का माना जा रहा था। वे भाजपा आलाकमान के करीबी रहे हैं और दूसरी खास बात यह है कि जहां भी उनको जिम्मेदारी दी जाती है उसे सफलतापूर्वक पूरा करते रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल के प्रभारी थे। हो सकता है कि चुनाव लड़ाने में उनसे ज्यादा भूमिका सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव ने निभाई हो लेकिन कई सालों से पश्चिम बंगाल के प्रभारी मंगल पांडेय ही थे।
तभी माना जा रहा था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली बड़ी जीत का इनाम मंगल पांडेय को भी मिलेगा। लेकिन उलटे वे सरकार से बाहर हो गए। वे पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे और कामकाज को लेकर भी ज्यादा शिकायत नहीं थी। उनकी जगह ब्राह्मण कोटे से मिथिलेश तिवारी को मंत्री बनाया गया है। वे बिहार और झारखंड के संघ के प्रभारी नागेंद्र के करीबी बताए जाते हैं। बहरहाल, अब कहा जा रहा है कि मंगल पांडेय को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। उनको नितिन नबीन की टीम में उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। महामंत्री बनना इसलिए मुश्किल है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी बिहार के हैं और ब्राह्मण महासचिव के तौर पर उत्तर प्रदेश के हरीश द्विवेदी के नाम की चर्चा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव हैं।
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