मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। उनसे पहले के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार भी सवालों के घेरे में थे। लेकिन ज्ञानेश कुमार की ज्यादा बदनामी हुई। तभी इस समय उनके बारे में इतने विस्तार से रिपोर्ट के प्रकाशन का क्या मकसद हो सकता है? गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ पहले भी इस तरह की रिपोर्ट्स करता रहा है लेकिन पिछले कुछ समय से उसका स्पष्ट रूझान सरकार की ओर है। तभी इस रिपोर्ट और इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। संदेह इसलिए पैदा हो रहा है क्योंकि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ बीच बीच में कुछ ऐसी रिपोर्ट छापता है, जो दिखती सरकार के खिलाफ है लेकिन उनका असल मकसद कुछ और होता है। सो, यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका क्या मकसद है।
दो बातों की संभावना इसमें देखी जा रही है। पहली तो यह कि ज्ञानेश कुमार के कारण चुनाव आयोग और सरकार की जो बदनामी हुई है उसका ठीकरा उनके ऊपर ही फोड़ कर उनको हटाया जाए। गौरतलब है कि उनकी आईएएस बेटी, नोएडा की कलेक्टर हैं उनको लेकर भी अदालतों की बड़ी सख्त टिप्पणियां आ रही हैं। दूसरी संभावना यह भी है कि ज्ञानेश कुमार के मुकाबले दोनों चुनाव आयुक्तों की छवि चमकाई जा रही हो ताकि आगे उनमें से कोई मुख्य चुनाव आयुक्त बने तो उसकी साख बनी रहे। यही दो संभावनाएं इसलिए दिख रही हैं क्योंकि एसआईआर के जरिए वोट काटने और वोट जोड़ने का जो खेल हुआ है उसे रोकने की कोई मंशा सरकार की नहीं है। एसआईआर और परिसीमन ये दो ऐसी चीजें हैं, जिनसे भारतीय जनता पार्टी 2029 का लोकसभा चुनाव जीतने की उम्मीद कर रही है।
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