राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

फेरबदल क्या अब सत्र के बाद!

नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल का मामला बीरबल की खिचड़ी की तरह हो गई है। पक ही नहीं रही है। पिछले एक साल से ज्यादा समय से मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा चल रही है। पिछले साल जून में सरकार के एक साल पूरे होने पर बदलाव की चर्चा शुरू हई थी और इस साल जून बीतने के बाद भी चर्चा जारी है। अब कहा जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के बाद सरकार में फेरबदल होगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मई में मंत्रिपरिषद की बैठक की थी। उसके बाद जून में सचिवों के साथ बैठक की। एनडीए की तीसरी सरकार के दो साल और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के 12 साल का जश्न मनाया गया। अब अक्टूबर में उनके सत्ता में आने के 25 साल पूरे होंगे तो उसकी रजत जयंती का जश्न पूरे देश में मनाया जाएगा। गौरतलब है कि वे अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। सो, सारे जश्न होंगे और ऐसे हर मौके से पहले चर्चा होगी कि इसके बाद मंत्रिमंडल बदला जाएगा। इन चर्चाओं में दिन, महीने, साल गुजरते जा रहे हैं।

असल में प्रधानमंत्री मोदी छह से 11 जुलाई तक तीन देशों की यात्रा पर जा रहे हैं। वे इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे। चार दशक के बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जा रहा है। लुक ईस्ट पॉलिसी के तहत प्रधानमंत्री की यात्रा अहम है। इससे पहले वे सेशेल्स और उससे पहले जून में फ्रांस व स्लोवाकिया की यात्रा पर गए थे। मई में प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात, नार्वे, नीदरलैंड, स्वीडन और इटली की यात्रा पर गए थे। हर यात्रा से पहले और उसके बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा होती है। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी 11 जुलाई को विदेश दौरे से वापस लौटेंगे और उसके बाद संसद का मानसून सत्र शुरू होने में नौ दिन का समय है। सत्र 20 जुलाई से शूरू हो रहा है और 13 अगस्त तक चलेगा। आमतौर पर संसद का सत्र चार हफ्ते का होता है लेकिन इस बार तीन हफ्ते का ही सत्र है। उसके बाद 15 अगस्त के समारोह होंगे। सो, अगर 12 से 19 जुलाई के बीच फेरबदल नहीं हुई तो इसका अर्थ होगा कि स्वतंत्रता दिवस के बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होगी।

जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं कि संसद के मानसून सत्र में वे नए मंत्रियों को विपक्ष के सामने उतारें। ध्यान रहे मानसून सत्र में सरकार कई ऐसे विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिनको लेकर विवाद चल रहा है। संविधान के 130वें और 131वें संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं। इसके अलावा राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से लेकर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने और परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सरकार बैकफुट पर है। विपक्ष ये सारे मुद्दे संसद में उठाएगे। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और तृणमूल कांग्रेस व उद्धव ठाकरे की शिव सेना के टूटने का मामला भी विपक्ष संसद में उठाएगा। ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी संसद सत्र तक पुराने मंत्रियों को रखना चाहते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं इसलिए सत्र बीतने का इंतजार करेंगे। हालांकि एक दूसरा समूह ऐसे नेताओं का है, जो हर दिन अपना नाम मीडिया में चलवा रहा है, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के इस बार विदेश से लौटते ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होगी। ऐसी कितनी डेडलाइन पहले निकल चुकी है।

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

15 − 6 =