कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले अंदरूनी घमासान खत्म करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है। कांग्रेस ने जिन नेताओं को प्रभारी बनाया है वे प्रदेश के किसी न किसी नेता के साथ जुड़ गए हैं और उसकी तरफ से पैरवी कर रहे हैं। कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी सचिवों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू कर रहे हैं लेकिन चुनावी राज्यों के नेताओं से मिल कर अंदरूनी विवाद खत्म करने के लिए उनसे मुलाकात नहीं कर रहे हैं। तभी गुजरात से लेकर पंजाब और उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक मामला बिगड़ रहा है। गोवा में भी कांग्रेस का अंदरूनी झगड़ा है और अगर चुनाव से पहले उसे ठीक नहीं किया गया तो कांग्रेस के लिए स्थिति पहले दो चुनावों से बेहतर नहीं होगी। आम आदमी पार्टी और रिवोल्यूशनरी गोवन पार्टी के साथ तालमेल की बातों से भी कांग्रेस का एक खेमा नाराज है।
बहरहाल, कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या उत्तर प्रदेश की है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को बदल सकती है। हालांकि ऐन चुनाव से पहले बिहार में इसी तरह राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष बदला था और वहां क्या दुर्गति हुई वह सबने देखा। लेकिन कांग्रेस नेता मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश का मामला अलग है। राहुल गांधी ने वहां आम आदमी पार्टी से आए दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बना कर भेजा है। उनसे अजय राय की नहीं बन रही है। वे चाहते हैं कि किसी मुस्लिम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए तो दलित और मुस्लिम समीकरण बनाना आसान होगा। उनका मानना है कि इससे अखिलेश यादव पर भी दबाव बनेगा। उन्होंने एक नेता की पहचान कर रखी है, जो पहले विधायक रहे हैं। एमआईएम के नेता आसीम वकार की कांग्रेस में एंट्री भी इसी रणनीति का हिस्सा है। इमरान मसूद अलग अपनी डफली बजा रहे हैं। उनके दामाद को अखिलेश ने अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है। हालांकि कांग्रेस के दूसरे नेता चाहते हैं कि प्रमोद तिवारी की बेटी और कांग्रेस विधायक आराधना उर्फ मोना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। पिछले दिनों प्रमोद तिवारी और मोना मिश्रा ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।
बहरहाल, गुजरात में राहुल गांधी ने अनगिनत प्रयोग किए और सारे प्रयोग नाकाम रहे हैं। शक्ति सिंह गोहिल अभी पार्टी के सबसे मजबूत नेता हैं लेकिन उनकी बजाय कांग्रेस के लोग जिग्नेश मेवाणी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिनका किरीट पटेल के साथ विवाद चल रहा है। राहुल खुद लगातार गुजरात के दौरे करते रहे लेकिन उन्होंने पार्टी के कई नेताओं पर संदेह पैदा कर दिया है। उन्होंने कह दिया था कि पार्टी के कुछ नेता भाजपा से मिले हुए हैं। उसके बाद से ही मामला बिगड़ा है। हालांकि रणदीप सुरजेवाला को प्रभारी बना कर भेजने के बाद कुछ सुधार की उम्मीद की जा रही है। उनको अमित चावड़ा और तुषार चौधरी के बीच भी तालमेल बनाना है। उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए अच्छी स्थितियां हैं। 10 साल की एंटी इन्कम्बैंसी और आपसी विवाद से भाजपा जूझ रही है। इसे ठीक करने के लिए ही भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को उपाध्यक्ष बनाया और अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बनाए रखा। लेकिन कांग्रेस में एकजुटता नहीं बन रही है। हरीश रावत अब भी चाहते हैं कि पार्टी उनके हिसाब से काम करे तो एक समय उनके करीबी रहे प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोंदियाल अपने हिसाब से काम करना चाहते हैं। प्रभारी कुमारी शैलजा चूंकि बहुत बड़ी नेता हैं इसलिए वे अपने हिसाब से काम करती हैं। राज्य में दलित 20 फीसदी और 15 फीसदी मुस्लिम हैं। यह एकमुश्त कांग्रेस के साथ जा सकता है। लेकिन बाकी 60 फीसदी ब्राह्मण और राजपूत का क्या होगा?
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