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वंदे मातरम पर कांग्रेस का विरोधाभास

कांग्रेस पार्टी ने 19 अगस्त को कार्य समिति की बैठक में तय किया कि वह वंदे मातरम के दो ही अंतरे गाएगी। इसके बाद एक एक करके कांग्रेस शासित राज्यों में भी इस तरह की घोषणा की। हाल में कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भी पार्टी लाइन फॉलो करेंगे। कांग्रेस ने जब दो अंतरे गाने का फैसला किया और उससे पहले 15 अगस्त को पार्टी मुख्यालय में झंडा फहराने के बाद वंदे मातरम गाने पर विवाद हुआ तो सबसे बड़ी खबर केरल से आई थी। केरल ने सरकारी कार्यक्रम से वंदे मातरम को हटा दिया था। वहां सिर्फ जन गण मन यानी राष्ट्रगान ही गाया गया था। उसके बाद से इसे लेकर विवाद चल रहा था।

अब खबर है कि केरल में कम से कम दो सरकारी कार्यक्रमों में पूऱा यानी सभी छह अंतरे वाला वंदे मातरम गाया गया। एक कार्यक्रम नेशनल स्पोर्ट्स डे का था, जिसमें राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और केरल के खेल मंत्री मौजूद थे। उसमें पहले और बाद में पूरा वंदे मातरम बजा। अब इसे लेकर विवाद हो गया है। लेफ्ट मोर्चा ने कांग्रेस पर सवाल उठाया है कि वह कहती कुछ और है, जबकि करती वही है, जो भाजपा चाहती है। दूसरी ओर केरल सरकार की सफाई है कि राज्यपाल कार्यालय की ओर से स्पष्ट दिशा निर्देश था कि पूरा वंदे मातरम बजाना है। यह भी कहा जा रहा है कि राज्यपाल कार्यालय की ओर से कहा गया था कि पूरा वंदे मातरम बजेगा तभी राज्यपाल मौजूद रहेंगे। बहरहाल, कारण चाहे जो रहा है लेकिन कांग्रेस की कथनी और करनी का अंतर दिख रहा है।

By NI Political Desk

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