सोचें, जिस समय दिल्ली में शराब नीति में हुए कथित घोटाले की बहस नए सिरे से शुरू हुई है उस समय दिल्ली की सरकार ने शराब से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाने के लिए होली को ड्राई डे की लिस्ट से बाहर कर दिया। राष्ट्रीय दिवसों के साथ साथ सभी धर्मों के मुख्य त्योहारों के दिन ड्राई डे होता है। यानी शराब नहीं मिलती है। न दुकानों में बिक्री होती है और न होटल, रेस्तरां आदि में शराब परोसी जाती है। लेकिन इस साल होली के मौके पर ड्राई डे नहीं था। उस दिन शराब बिक रही थी और होटल, रेस्तरां में भी शराब परोसी जा रही थी। बताया जा रहा है कि 31 मार्च को खत्म होने वाले वित्त वर्ष में दिल्ली सरकार का शराब राजस्व का लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा था इसलिए ऐसा किया गया।
असल में दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए छह हजार करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य रखा है। इसमें वैट शामिल नहीं है। वैट के साथ पिछले साल सात हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व मिला था। इस साल बिना वैट के लक्ष्य छह हजार करोड़ रुपए का है और 31 जनवरी 2026 तक शराब से राजस्व मिला था 4,992 करोड़ रुपए। हालांकि 10 महीने में पांच सौ करोड़ रुपए के मासिक औसत से सरकार को राजस्व मिल रहा था। लेकिन पता नहीं कैसे ऐसा लगा कि फरवरी और मार्च में एक हजार करोड़ रुपए से कुछ ज्यादा की वसूली संभव नहीं होगी। तभी होली के दिन भी शराब बेचने का फैसला हुआ। बताया जा रहा है कि विभाग के अधिकारियों ने सोचा है कि होली है तो उस दिन लोग शराब पीते ही है सो, इधर उधर से खरीदें, ज्यादा दाम देकर खरीदें उससे अच्छा है कि सरकार ही शराब मुहैया करा देती है।


