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वंदे मातरम पर ‘इंडिया’ ब्लॉक में मतभेद

कांग्रेस पार्टी ने अचानक वंदे मातरम को बड़ा मुद्दा बना दिया है और इस पर टकराव पैदा कर रही है। यह अचानक हुआ इसलिए लग रहा है क्योंकि संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस इस पर अपनै स्टैंड स्पष्ट करने से बच रही थी। कांग्रेस के नेता इस बात से खुश थे कि जंतर मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के विवाद की वजह से संसद ठप्प है और वंदे मातरम का बिल बिना बहस या वोटिंग के पास हो गया। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा था कि अगर संसद सामान्य रूप से चल रही होती और इस पर बहस की नौबत आती तो कांग्रेस को स्टैंड स्पष्ट करना होता। मुश्किल यह थी कि अगर वह सभी छह अंतरा गाने का समर्थन करती तो मुस्लिम नाराज होते और अगर खुल कर इसका विरोध करती तो बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं में यह मैसेज जाता कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण इसका विरोध कर रही है। लेकिन अब कांग्रेस का रुख बदल गया है।

अब कांग्रेस ने दो टूक स्टैंड लिया है कि वह वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाने के कानून का विरोध करेगी। उसकी राज्य सरकारों ने प्रस्ताव पास किया है कि उनके कार्यक्रम में दो ही अंतरे गाए जाएंगे। कर्नाटक की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल जिस कार्यक्रम में होंगे उनको छोड़ कर बाकी में दो ही अंतरे गाए जाएं। अब एक केंद्रीय कानून के खुलेआम उल्लंघन पर केंद्र सरकार क्या स्टैंड लेगी या कानूनी स्थिति बनती है वह बाद में पता चलेगा। लेकिन अभी साफ दिख रहा है कि कांग्रेस टकराव की राजनीति के रास्ते पर चल रही है। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस इस मामले में अपनी सहयोगी पार्टियों और विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक के घटक दलों से भी विवाद मोल रही है। उसको पता है कि सहयोगी पार्टियां उसकी तरह का हार्ड स्टैंड नहीं ले रही हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक में इसे लेकर अलग सोच है। लेकिन कांग्रेस को इसमें राजनीतिक लाभ मिल रहा है।

पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में सरकार चला रही नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस पर अलग रुख लिया। कम से कम दो सरकारी कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम गाया गया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व उनके पिता फारूक अब्दुल्ला राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहे। इस पर कांग्रेस ने सवाल उठाया। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उमर अब्दुल्ला की आलोचना की और यह सवाल उठाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने क्यों सभी छह अंतर गाए जाने दिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का मानना है कि वे केंद्र सरकार के साथ इस मुद्दे पर पंगा नहीं ले सकते हैं। बाकी राज्य का तो नहीं पता लेकिन जम्मू कश्मीर की जैसी स्थिति है उसमें राज्य सरकार के लिए केंद्रीय कानून का उल्लंघन ठीक नहीं होगा। बहरहाल, कांग्रेस को यह भी पता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस मसले पर कांग्रेस का साथ नहीं दे सकती है। बंगाल में एक बड़ा सांस्कृतिक मुद्दा है और तृणमूल कांग्रेस यह जोखिम नहीं उठा सकती है। फिर भी कांग्रेस अगर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों की परवाह किए बगैर यह मुद्दा उठा रही है तो इसका एक अर्थ यह भी है कि वह जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और केरलम में मुस्लिम लीग से भी ज्यादा कट्टरपंथी दिखना चाहती है ताकि मुस्लिम वोट उसकी ओर आकर्षित हो।

By NI Political Desk

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