धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्या भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय पहले से ज्यादा सक्षमता के साथ काम कर रहा है? कहा नहीं जा सकता है। क्योंकि पिछले कुछ समय से शिक्षा मंत्रालय को लेकर कोई खबर नहीं है। सरकार ने शिक्षा में पूर्णकालिक मंत्री नहीं नियुक्त किया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। वे खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पहले से हैं। इतना ही नहीं उनके पास नवीकरणी ऊर्जा मंत्रालय भी है। इसके साथ साथ उनको शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
सोचें, शिक्षा मंत्रालय के कामकाज को लेकर छात्रों ने इतना बड़ा आंदोलन किया और सरकार को शिक्षा और परीक्षा से जुड़े कई अहम सुधार करने हैं लेकिन मंत्रालय कामचलाऊ तरीके से चल रहा है। यह सही है कि संसद सत्र के बीच में मंत्रिमंडल फेरबदल नहीं होना था और किसी नए मंत्री को शपथ नहीं दिलानी थी इसलिए प्रभारी मंत्री है। लेकिन सरकार इतना तो कर ही सकती है कि अगर प्रह्लाद जोशी को ही शिक्षा मंत्रालय देना है तो उनके बाकी मंत्रालय का प्रभार किसी और को दे दिया जाए। इसमें कोई समस्या नहीं होगी। ध्यान रहे प्रह्लाद जोशी का राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के साथ संबंध है और संघ को खुश करने या एक मैसेज बनवाने के लिए उनको शिक्षा मंत्रालय दिया गया। ऐसा ही मैसेज अगर सरकार छात्रों के लिए भी बनवाना चाहती तो खाद्य, आपूर्ति व उपभोक्ता मामले और नवीकरणीय ऊर्जा का विभाग लेकर किसी और मंत्री को दे देती। ऐसा नहीं किया गया इससे भी लग रहा है कि सरकार शिक्षा को कैसे ट्रीट करना चाहती है।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



