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डॉलर का आना- जाना

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एआई ढांचे में निवेश से डॉलर जरूर भारत आएगा, लेकिन दूसरी वजहों से बाहर जा रहे डॉलर से उत्पन्न समस्या का यह हल नहीं है। समाधान उन कारणों को दूर करने से ही होगा, जो समस्या की जड़ में हैँ।

गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब अमेजन ने भारत के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) ढांचे में बड़ा निवेश करने का इरादा जताया है। अमेजन ने कहा है कि वह 2030 तक भारत में एआई क्षमताएं बढ़ाने तथा निर्यात को बढ़ावा देने के मकसद से 35 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने एआई डेटा सेंटर बनाने के लिए क्रमशः 15 और 17.5 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा कर रखी है। जब भारत से विदेशी एवं देशी पूंजी बाहर जाने की चर्चाओं और उसके परिणामस्वरूप रुपये की कीमत में रिकॉर्ड गिरावट के कारण मायूसी का आलम है, ऐसी घोषणाओं को आशाजनक बताया गया है। मगर दो बातें गौरतलब हैं।

ये तमान निवेश (अगर हुए तो) अगले चार साल के दौरान होंगे। यानी इनसे फौरी राहत की संभावना नहीं है। दूसरे, इनसे उन कारणों का निवारण नहीं होता, जिनसे विदेशी इक्विटी या पोर्टफोलियो निवेशकों ने अपना पैसा यहां से निकालना शुरू किया। विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय शेयरों का कंपनी के मुनाफे की तुलना में ओवरवैल्यू होना इनमें प्रमुख कारण है। प्राइस टू अर्निंग रेशियो 23 तक पहुंच चुका है, जिसे बाजार में बनते बबूले का संकेत समझा गया है। इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ को लेकर जारी अनिश्चय तथा भारत के आर्थिक आंकड़ों को लेकर बढ़ते अविश्वास ने हालात को बदतर बनाया है। ऐसे में निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बनाने की राह पर चले हैं।

उसका रुपये की कीमत गिरने से सीधा संबंध है। अब कीमत गिर गई है, तो उसका असर विदेशी निवेशकों के मुनाफे पर पड़ा है। भारतीय बाजार में उनका औसत मुनाफा छह प्रतिशत रहा है, जबकि इस वर्ष रुपये की कीमत में पांच प्रतिशत से अधिक गिरावट आ चुकी है। यानी साल भर पहले हुए डॉलर निवेश पर भारत में मुनाफा लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है। यह सिलसिला एक तरह का दुश्चक्र बनने का संकेत है। एआई ढांचे में निवेश से डॉलर जरूर भारत आएगा, लेकिन दूसरी वजहों से बाहर जा रहे डॉलर से उत्पन्न समस्या का यह हल नहीं है। समाधान उन कारणों को दूर करने से ही होगा, जो समस्या की जड़ में हैँ।

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By NI Political Desk

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