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मोहन यादव की मुश्किल

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी भाजपा चुनाव हार गई है। यह सीट पिछले चुनाव भी भाजपा हारी थी। भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा इस सीट से लगातार जीतते रहे थे। हालांकि हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर कम हो रहा था। पिछली बार वे चुनाव हार गए थे। उसके बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट मांगा, जो नहीं मिला। वे वीडी शर्मा के बाद प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे। वह भी नहीं हुआ। राष्ट्रीय महासचिव बनने का प्रयास भी विफल रहा। उनके लिए एक मौका बना, जब कांग्रेस के जीते हुए उम्मीदवार राजेंद्र भारती को सजा हो गई और दतिया सीट खाली हो गई। कहा जा रहा था कि राजेंद्र भारती के खिलाफ मुकदमा अंत नतीजे तक जल्दी पहुंचे इसमें नरोत्तम मिश्रा ने भी भूमिक निभाई थी। तभी जब सीट खाली हुई तो उन्होंने चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी।

लेकिन अचानक उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया गया। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आशुतोष तिवारी का नाम तय कराया। यह भी चर्चा है कि हर राज्यों में पुराने क्षत्रपों को हाशिए में डालने की रणनीति के तहत ही यह काम हुआ। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मोहन यादव को आगे करके फैसला कराया। चाहे फैसले जिसने कराया हो लेकिन सवाल मोहन यादव पर उठ रहा है। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि मोहन यादव ने भरोसा दो कर नरोत्तम मिश्रा की टिकट यह कह कर कटवाई थी कि वे चुनाव जीत कर देंगे। उनके लिए यह मौका भी था। जमीन के विवाद में मोहन यादव और उनके परिवार के सदस्यों का नाम आने के बाद यह मौका था कि वे अपने को साबित करें। लेकिन इसमें वे फेल रहे। सोचें, आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव को 22 हजार वोट मिले, जिसमें ज्यादा हिस्सा कांग्रेस के वोट का था। फिर भी भाजपा का उम्मीदवार छह हजार से ज्यादा वोट से हारा। जमीन विवाद के बाद मोहन यादव के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। यह भी मैसेज गया है कि उनके सीएम होने के बावजूद यादव वोट दामोदर यादव के साथ गया।

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By NI Political Desk

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