विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं है लेकिन शक्ति परीक्षण सरकार का होना है। तभी सोमवार, नौ मार्च को लोकसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ संसदीय प्रबंधकों पर निर्भर नहीं है। उन्होंने खुद कमान संभाली है। प्रधानमंत्री ने शनिवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चुनाव क्षेत्र कोटा में हवाईअड्डे का शिलान्यास किया। उन्होंने शिलान्यास के बाद वर्चुअल तरीके से जनसभा को संबोधित करते हुए ओम बिरला की जम कर तारीफ की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ओम बिरला संसदीय मूल्यों और सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध हैं और उनके प्रति पूरी निष्ठा रखते हैं। लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग से दो दिन पहले प्रधानमंत्री का उनके चुनाव क्षेत्र में एक बड़ी परियोजना का शिलान्यास करना और फिर उनकी इतनी जम कर तारीफ करना, अनायास नहीं है। यह सोमवार के शक्ति परीक्षण की तैयारी का हिस्सा है।
दूसरी ओर विपक्ष की तैयारियां भी कमजोर नहीं हैं। हालांकि विपक्ष यह नहीं मान रहा है कि उसे कामयाबी मिल जाएगी। लेकिन उसका प्रयास मुकाबले को नजदीक से नजदीकतर ले जाने की है। यह सही है कि विपक्ष बिखरा हुआ है और अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने दस्तखत नहीं किए। लेकिन अब तृणमूल ने ऐलान किया है कि वह अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का साथ देगी। यह पश्चिम बंगाल में बदलते हालात की वजह से है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद चुनाव आयोग लाखों मतदाताओं के नाम काट रहा है, जिसके खिलाफ ममता बनर्जी शुक्रवार से धरने पर बैठी हैं। इस बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भी यात्रा हुई और उसमें भी उनका विवाद हुआ। उस विवाद में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कूदे और उन्होंने ममता को निशाना बनाया। सो, विवाद इतना बढ़ गया है कि ममता विपक्ष के साथ अपनी दूरी समाप्त कर रही हैं।
सो, लोकसभा में सोमवार को होने वाली चर्चा भी दिलचस्प होगी और वोटिंग भी अच्छी होगी। सरकार के संसदीय प्रबंधकों के लिए पक्ष और विपक्ष का अंतर बहुत बड़ा करना आसान नहीं होगा। गौरतलब है सरकार के पास 293 सांसदों का समर्थन है। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के 204 सांसद हैं। अगर इनमें ममता बनर्जी के 29 सांसदों को जोड़ दें तो विपक्ष की संख्या 233 हो जाती है। इस तरह यह 293 बनाम 233 का मुकाबला है। कायदे से कम से कम 60 वोट से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव फेल होना चाहिए। अगर यह अंतर बढ़ता है तो वह विपक्ष की विफलता मानी जाएगी और अगर अंतर कम होता है तो सरकार के लिए चिंता की बात होगी। ध्यान रहे पक्ष और विपक्ष के इस आंकड़े से इतर 17 सासंद और हैं, जो तकनीकी रूप से पक्ष या विपक्ष के साथ नहीं हैं। इनमें जगन मोहन रेड्डी के सांसद हैं तो साथ ही असदुद्दीन ओवैसी और हरसिमरत कौर बादल भी हैं। जम्मू कश्मीर के निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद हैं तो पंजाब के दो निर्दलीय सांसद अमृतपाल और सरबजीत सिंह खालसा भी है। दोनों पक्ष इनका वोट हासिल करने का प्रयास करेंगे या इनको गैर हाजिर करने का प्रयास किया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि पक्ष और विपक्ष से दूरी रखने वाले 17 सांसद क्या रुख दिखाते हैं। जो हो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार उनके सामने इस तरह की चुनौती आई है।


