राजधानी दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पहला सम्मेलन हो रहा है। 16 से 20 फरवरी के बीच यह सम्मेलन होगा। इसमें हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर की एआई कंपनियां और स्टार्टअप्स के लोग आ रहे हैं। सैम ऑल्टमैन भी दिल्ली आ रहे हैं। सैकड़ों सीईओ और टेक्नोक्रेट दिल्ली में रहने वाले हैं। लेकिन इसे लेकर भारत में अभी तक मुख्य रूप से जो खबर चर्चा में है वह ये है कि होटलों की मारामारी हो रही है। इस एआई सम्मेलन के लिए भारत की क्या तैयारी या भारत की कितनी कंपनियां इसमें हिस्सा लेंगे और इससे भारत में एआई इकोसिस्टम पर क्या असर होगा, इसकी चर्चा की बजाय होटल के कमरे महंगे होने की खबर है।
यह दिल्ली की खास खबर है कि 16 से 20 फरवरी के बीच दिल्ली के सभी पांच सितारा होटल भर गए हैं और एक भी कमरा खाली नहीं है। यह भी खबर है कि कमरे का किराया जो पहले 20 हजार था वह 50 हजार से ऊपर है और 40 हजार के सूट रूम का किराया डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा हो गया है। सोचें, क्या इतना बड़ा सम्मेलन दिल्ली में हो रहा है तो सरकार को सर्ज प्राइस पर ध्यान नहीं रखना चाहिए? लेकिन भारत में हर मौके पर चाहे वह इस तरह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो या कोई आपदा हो विमानन कंपनियों से लेकर होटल वाले और कैब सर्विस वाले अनाप शनाप किराया वसूलने लगते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को समस्या होती है और छवि पर भी असर पड़ता है।


