कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर चुनाव हुए थे। सभी चार सीटों पर एनडीए जीत गई है। कांग्रेस पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली है। यह कांग्रेस के लिए तो झटका है लेकिन उससे ज्यादा बड़ा झटका मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए है। पहली बार उनके प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि वे पहले से पार्टी के अंदर विरोध झेल रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थकों को काबू में किया है और पार्टी व सरकार पर अपनी पकड़ मजबूत की है। लेकिन विधान परिषद के नतीजों के बाद सिद्धारमैया खेमा आक्रामक हो गया। हालांकि इससे डीके शिवकुमार की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है लेकिन धारणा के स्तर पर बिल्कुल नीचे जा रही भाजपा को संजीवनी मिली है और शिवकुमार की चुनौतियां बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा की सहयोगी जेडीएस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बड़ी मेहनत की थी। भाजपा के नेता भी जोर लगा रहे थे। तभी पश्चिमी स्नातक, उत्तर पश्चिमी शिक्षक, दक्षिण पूर्व स्नातक और बेंगलुरू शिक्षक चारों सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल की है। जेडीएस को बेंगलुरू की शिक्षक सीट पर जीत मिली है। तीन सीटों पर भाजपा और एक पर जेडीएस को जीत मिली है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधान परिषद के चुनाव को बहुत गंभीरता से नहीं ले रही थी और पूरी पार्टी एक होकर लड़ भी नहीं रही थी।
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