डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने के साथ ही सरकाऱ, संगठन और राजनीतिक नैरेटिव पर अपना नियंत्रण बनाने का खेल शुरू कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे को गृह मंत्री बनाना इसी खेल का हिस्सा है। सोचें, राज्य के बड़े दलित नेता जी परमेश्वरा गृह मंत्री थे। सिद्धारमैया की सरकार में उनकी बड़ी हैसियत इसी वजह से थे। वे अब उप मुख्यमंत्री बन गए हैं लेकिन गृह मंत्रालय उनसे लेकर प्रियांक खड़गे को दे दिया गया है। इतना ही नहीं प्रियांक के पास पहले से आईटी और बीटी मंत्रालय था, जो उनके पास ही रहने दिया गया है। इस तरह प्रियांक का कद बढ़ा कर शिवकुमार ने एक तीर से दो शिकार किए हैं।
पहला काम तो उन्होंने यह किया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे का सद्भाव हासिल किया है। दूसरा काम यह है कि सिद्धारमैया जिस अहिंदा वोट का अपने को मालिक मानते थे और कांग्रेस आलाकमान पर उसकी तलवार लटकाए रखते थे उसमें फूट डाल दी है। ध्यान रहे सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के साथ मिल कर प्रियांक अहिंदा समीकरण को आगे बढ़ा रहे थे। अब प्रियांक को वहां से निकाल कर शिवकुमार ने अपने साथ किया है। इसके साथ ही कांग्रेस आलाकमान को यह मैसेज दिया है कि अहिंदा का दलित और मुस्लिम अपने आप कांग्रेस के साथ है। वह हर हाल में कांग्रेस को वोट करेगा। अब अपने दम पर शिवकुमार वोक्कालिगा वोट ले आएंगे। रही बात पिछड़ी जातियों की तो वह बंटा हुआ है। उसका एक हिस्सा अब भी कांग्रेस को वोट दे सकता है। शिवकुमार ने यह भी बताया है कि सिद्धारमैया की जाति यानी कुरुबा का वोट तो लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के साथ गया था।
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