राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की उनकी टीम कामयाब हो गई। सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को आखिरकार कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से अलग कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इसके लिए सीपीआई एमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से बात हुई। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से दीपांकर भट्टाचार्य से राहुल गांधी की अच्छी बन रही है। सीताराम येचुरी के बाद दीपांकर ही सामाजिक मुद्दों पर राहुल को सलाह दे रहे हैं। सो, उन्होंने अपनी पार्टी की नेता नेहा बोरा को समझाया और खुद भी यह फैसला किया कि मुख्यधारा के विपक्ष के साथ ही रहना चाहिए। तभी सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान नेहा बोरा उस ट्रक पर सवार हुईं, जिस पर राहुल के साथ विपक्ष के तमाम नेता थे। वे अगले दिन राहुल के घर पर चाय पार्टी में भी शामिल हुईं और वहां बड़े नेताओं के साथ मीडिया को भी संबोधित किया। दीपांकर भट्टाचार्य ने इस मौके पर अपने को पीछे रखा।
गौरतलब है कि इससे पहले जंतर मंतर पर हर प्रोटेस्ट में नेहा बोरा का चेहरा होता था। पेपर लीक के मसले पर भी सोनम वांगचुक के साथ नेहा बोरा ने 20 दिन तक भूख ह़ड़ताल की थी। वे बहुत अच्छा भाषण करती हैं और राजनीति का अंदाज भी बहुत आक्रामक है। उनके साथ आइसा और लेफ्ट इकोसिस्टम के बहुत सारे युवा प्रोटेस्ट में शामिल होते थे, जिससे सीजेपी के प्रदर्शन को ज्यादा तवज्जो मिलती थी। अब राहुल गांधी उनको अपने खेमे में लाने में कामयाब हो गए हैं। राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को ‘चलो दिल्ली मार्च’ आह्वान किया था और विपक्षी नेताओं के साथ वे सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। उस प्रदर्शन में नेहा बोरा उनके साथ थीं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों के साथ नेहा का बहुत अच्छा तालमेल दिखा। एक तस्वीर तो ऐसी वायरल हुई है, जिसमें राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका और नेहा के कंधे पर हाथ रख कर चल रहे हैं। महात्मा गांधी की एक ऐतिहासिक तस्वीर से इसकी तुलना की जा रही है।
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