नितिन नबीन को भाजपा का अध्यक्ष बने छह महीने हो गए। वैसे तो उनको पिछले साल दिसंबर में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन जनवरी में वे पूर्णकालिक अध्यक्ष बन गए। तभी से इस बात की चर्चा चल रही है कि बहुत जल्दी राष्ट्रीय संगठन में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति होगी। लेकिन छह महीने में नितिन नबीन नई टीम नहीं बना पाए हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि इसे लेकर कुछ नहीं हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से तो लगातार बैठकें हो रही हैं। अभी हाल ही में नितिन नबीन, अमित शाह और बीएल संतोष की बैठक हुई है। इससे पहले एक बैठक राजनाथ सिंह के घर पर हुई थी। उसके बाद नितिन नबीन ने अकेले अमित शाह से मुलाकात की थी। ऐसी हर मुलाकात के बाद कहा गया कि बहुत जल्दी संगठन में फेरबदल होने जा रही है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि भाजपा संगठन और केंद्र की सरकार दोनों में बदलाव का मामला आपस में मिल गया है और दोनों में से कोई काम नहीं हो रहा है।
अब सवाल है कि अगर मंत्रिमंडल में फेरबदल संसद के मानसून सत्र के बाद होती है तो क्या संगठन में बदलाव उससे पहले हो सकता है? भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि दोनों को जोड़ने की जरुरत नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा ने पिछले 12 साल में बदलाव के साथ निरंतरता का सिद्धांत बनाया था। अमित शाह ने जो टीम बनाई थी वह टीम जेपी नड्डा के साथ काम करती थी और धीरे धीरे उसमें से लोग हटे। उसी तरह नड्डा की टीम अभी काम कर रही है और धीरे धीरे लोगों को हटाया जाएगा। चूंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष 46 साल के हैं इसलिए उनसे बहुत ज्यादा उम्र और अनुभव वाले लोगों को उनकी टीम में नहीं रखा जाएगा। इसलिए सरकार से लाकर संगठन में लोगों को रखने की संभावना कम है। मौजूदा टीम में से कुछ महामंत्रियों की विदाई होगी। उनकी जगह कम उम्र के नेता महामंत्री बनाए जाएंगे। ज्यादा उम्र के नेताओं को उपाध्यक्ष बना कर कुछ जिम्मेदारी दी जाएगी।
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