महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद उनकी पार्टी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। शुरू में तो ऐसा लगा था कि पार्टी बिखर जाएगी। यह भी लग रहा था कि प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे नेता पार्टी टेकओवर कर लेंगे। कई बार ऐसा लगा कि शरद पवार ही अब दोनों पार्टियों को संभालेंगे और अंततः दोनों का विलय हो जाएगा। लेकिन अब चार महीने से भी कम समय में हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। पार्टी अब स्थिर है। सुनेत्रा पवार राष्ट्रीय अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री हैं और उनके बेटे पार्थ पवार ने पार्टी को संभाल लियी है।
सुनेत्रा ने अपने बेटे पार्थ को पार्टी का महासचिव बनाया है और दूसरे बेटे जय पवार को सचिव बनाया है। पार्थ और जय के करीबियों और उनके रिश्तेदारों को पार्टी की कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव आयोग में सुनेत्रा पवार ने एनसीपी के 11 नेताओं की कार्यकारिणी की जो सूची भेजी है उसमें न तो पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का नाम है और न प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का नाम है। हालांकि 25 लोगों की लंबी सूची में इनका नाम है। कहा जा रहा है कि पार्थ पवार पूरी तरह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के असर में हैं और उनके हिसाब से काम कर रहे हैं। फड़नवीस ने पार्टी पर उनका नियंत्रण बनवाया है। शनिवार की आधी रात को फड़नवीस से मिलने गए थे पार्थ। उसके बाद पार्टी में हलचल तेज हो गई। रविवार को प्रफुल्ल पटेल और तटकरे ने शरद पवार से मुलाकात की। ये नेता चाहते हैं कि शरद पवार अब मामला सुलझाएं और पार्टी संभालें। लेकिन सुनेत्रा और पार्थ ऐसा नहीं चाहते हैं।


