ऐसा लग रहा है कि देश भले पुलिस स्टेट नहीं बने लेकिन दिल्ली जरूर बनी रहेगी। धीरे धीरे अर्धसैनिक बलों की तैनाती स्थायी होती जा रही है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन के ऐलान और खासकर कॉकरोच जनता पार्टी के 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर आंदोलन को लेकर अर्धसैनिक बलों की दिल्ली में तैनाती की गई थी। देश के अलग अलग राज्यों से बुला कर अर्धसैनिक बलों की 221 टुकड़ियां दिल्ली में तैनात की गई। करीब 23 हजार जवान तैनात किए गए। इनके साथ दिल्ली पुलिस की तैनाती अलग से होती है। अर्धसैनिक बल पहले 12 अक्टूबर तक तैनात किए गए। उसके बाद उसे एक बार बढ़ाया गया और अब 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया है।
ध्यान रहे एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की रैली होने वाली है और ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ जैसे नए संगठनों के साथ साथ लेफ्ट के छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी व आम आदमी पार्टी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में संभव है कि 31 अक्टूबर के बाद भी अर्धसैनिक बलों की तैनाती बनी रहे। अर्धसैनिक बलों की इतनी बड़ी तैनाती होने पर उनके लिए ट्रांसपोर्ट और रहने का बंदोबस्त भी करना होता है। तभी इन दिनों दिल्ली में कहीं भी निकलें हर थाने के आसपास दर्जनों गाड़ियां, बस आदि खड़े मिलेंगे, जो अर्घसैनिक बलों के मूवमेंट के लिए तैयार रखे गए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की हर तरफ मौजूदगी साफ देखी जा सकती है।
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