यह बहुत दिलचस्प है कि लंबे समय के बाद शशि थरूर ने जिस दिन राहुल गांधी के समर्थन में बयान दिया उसी दिन दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा नए सिरे से तेज हुई कि शशि थरूर भाजपा में जा सकते हैं। हालांकि यह चर्चा नई नहीं है। इस साल मई में हुए केरलम विधानसभा चुनाव के पहले से इस बात की चर्चा हो रही थी। असल में थरूर चुनाव से पहले इस बात के लिए दबाव बना रहे थे कि उनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना कर चुनाव लड़ा जाए। लेकिन कांग्रेस ने मना कर दिया। उसके बाद वे दलीय राजनीति से ऊपर उठ कर बयानबाजी करने लगे थे और लेख लिखने लगे थे। वे कभी सरकार की तारीफ करते तो कभी विपक्ष के राजनीतिक मेथड पर सवाल उठाते हैं। उनको इस बात की तकलीफ है कि कांग्रेस ने उनको कुछ नहीं दिया। न प्रदेश अध्यक्ष बनाया, न लोकसभा में नेता बनाया और न उप नेता बनाया। पार्टी संगठन में भी कोई पद नहीं मिला।
बहरहाल, नई चर्चा यह छिड़ी है कि वे भाजपा में जा सकते हैं और भाजपा उनको केंद्र में मंत्री बना सकती है। यहां तक कहा कि यह काम अगले एक हफ्ते में हो सकता है। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में एल मुरुगन की जो राज्यसभा सीट खाली कराई गई है उस सीट से शशि थरूर को राज्यसभा भेजा जा सकता है। उनके इस्तीफे से तिरुवनंतपुरम की लोकसभा सीट खाली होगी तो चुनाव आयोग उसे वैसे ही खाली रख सकता है, जैसे बशीरहाट की सीट दो साल से खाली रखी गई है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर चुनाव कराया जाता है तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर लड़ सकते हैं। पिछली बार वे सिर्फ 16 हजार वोट से हारे थे। थरूर अगर उनका समर्थन करेंगे तो वे चुनाव जीत सकते हैं। चर्चा है कि सरकार को विदेश मामले संभालने के लिए थरूर जैसे नेता की जरुरत है। हालांकि समस्या यह है कि एस जय़शंकर से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मोहभंग नहीं हुआ है। हां, हरदीप पुरी विदा होते हैं तो थरूर उनकी जगह की भरपाई कर सकते हैं। हालांकि यह अब भी बहुत दूर की कौड़ी है। थरूर शायद ही पाला बदलें।
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