Shashi Tharoor

  • थरूर ने भी दी नसीहत

    नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी की नीतियों पर सवाल उठा रहे और केंद्र सरकार की तारीफ कर रहे शशि थरूर ने भी कांग्रेस नेतृत्व को इशारों इशारों में नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। हालांकि शनिवार को वे कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल हुए। उससे पहले उन्होंने नए रोजगार गारंटी कानून और परमाणु ऊर्जा कानून को लेकर केंद्र सरकार की...

  • थरूर और अर्णब की नाराजगी क्यों

    इन दिनों सार्वजनिक स्पेस में दिलचस्प चीजें हो रही हैं। टेलीविजन के जाने माने एंकर अर्णब गोस्वामी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। यह बड़े आश्चर्य की बात है। उन्होंने भाजपा विरोधी पार्टियों को निशाना बना कर और भाजपा व नरेंद्र मोदी के एजेंडे का समर्थन करके ही अपना चैनल स्थापित किया। इसी वजह से वे विपक्ष के निशाने पर रहे और उनको महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने जेल भेजा था। लेकिन अचानक वे केंद्र सरकार और भाजपा का विरोध करने लगे हैं। उन्होंने पिछले एक हफ्ते में तीन मुद्दों पर सरकार को कठघरे में...

  • थरूर का हृदय परिवर्तन हो गया!

    केरल की तिरूवनंतपुरम सीट के चार बार के सांसद शशि थरूर का क्या हृदय परिवर्तन हो गया? एक के बाद एक तीन ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिनसे लग रहा है कि थरूर के कदम थम गए हैं और वे भाजपा की ओर बढ़ने की बजाय जहां हैं वहीं रहना चाहते हैं। एक हफ्ते पहले तक ऐसा लग रहा था कि शशि थरूर बस भाजपा में जाने ही वाले हैं। वे हर बात पर सरकार का समर्थन कर रहे थे और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा रहे थे। पिछले दिनों एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी...

  • शशि थरूर, सावरकर व कैटल क्लास

    पिछले सप्ताह ख़बर थी कि शशि थरूर ने सावरकर के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कार को अस्वीकारा। क्यों? एक ओर वे हिंदू राजनीति का गुड़ खा रहे हैं, मोदी–पुतिन की दोस्ती की व्याख्या से लेकर सरकार की विदेश नीति और ‘मैं हिंदू क्यों हूं’ जैसी वैचारिक प्रस्तुति है वही दूसरी ओर, कांग्रेस और केरल की राजनीति में वे पैंतरे हैं, जिनसे कमल खिले और कांग्रेस सिमटे। तब फिर सावरकर के नाम से परहेज़ क्यों? मामला वही है, गुड़ खाना है, पर गुलगुलों से दूरी बनाए रखनी है। सवाल है कि थरूर को सावरकर के नाम और उनकी तस्वीर से...

  • थरूर का सारवकर अवार्ड लेने से इनकार

    नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर पिछले कुछ समय से भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में बोल रहे हैं और केंद्र सरकार का बचाव कर रहे हैं लेकिन उन्होंने सावरकर के नाम पर पुरस्कार लेने से मना कर दिया है। सावरकर अवार्ड देने की घोषणा के बाद थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘मैं ये अवॉर्ड लेने नहीं जा रहा हूं। मुझे इसके बारे में केरल में रहते हुए मीडिया रिपोर्ट्स से ही जानकारी मिली’। उन्होंने कहा ‘आयोजकों ने बिना पूछे मेरा नाम घोषित किया है। ऐसे में दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने...

  • शशि थरूर चाहते हैं कि पार्टी कार्रवाई करे

    केरल की तिरूवनंतपुरम सीट से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व की परेशानी बढ़ाई है। अगले साल अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले थरूर की राजनीति कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। वे लगातार कांग्रेस पार्टी से अलग लाइन पर बयान दे रहे हैं और कांग्रेस से दूरी भी बना रहे हैं। रविवार, 30 नवंबर को वे लगातार दूसरी बार कांग्रेस की ओर से बुलाई गई अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। 30 नवंबर को संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सोनिया गांधी ने रणनीतिक समूह की बैठक बुलाई थी, जिसमें थरूर ने हिस्सा नहीं लिया।...

  • थरूर ने कहा, कश्मीर से शुरू हुआ था आतंकवाद

    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बात का जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि आतंकवाद की शुरुआत जम्मू कश्मीर से हुई थी। गौरतलब है कि अब्दुल्ला पिता, पुत्र ने दिल्ली में लाल किले के सामने विस्फोट के बाद कहा था कि हर कश्मीर को संदेह की नजर से देखना ठीक नहीं है। दोनों ने यह भी कहा था कि हर कश्मीर आतंकवादी नहीं है। इस पर थरूर ने कहा है, 'आतंकवाद 1989-90 में कश्मीर से शुरू हुआ और धीरे-धीरे मुंबई, पुणे, दिल्ली तक फैल गया है।...

  • कांग्रेस ज्यादा वामपंथी हो रही है: थरूर

    नई दिल्ली। कांग्रेस पर वंशवाद के आरोप लगाने के बाद अब शशि थरूर ने कांग्रेस पर वामपंथी रूझान रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ सालों में पहले से ज्यादा वामपंथी रुख अपनाने लगी है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भाजपा की 'विभाजनकारी राजनीति' का जवाब देने के लिए एक तरह का रणनीतिक कदम माना जा सकता है। थरूर ने हैदराबाद में ज्योति कोमिरेड्डी मेमोरियल लेक्चर में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के दौर में कांग्रेस का रुख मध्यमार्गी था। तब कई नीतियां पिछली भाजपा सरकार से भी ली गई थीं।...

  • थरूर के लिए अब कांग्रेस में जगह नहीं

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस की दुखती नस दबा दी है। अब तक वे राजनीतिक और नीतिगत मसले पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठा रहे थे लेकिन अब उन्होंने वंशवाद का मुद्दा उठा दिया है। थरूर ने कहा है कि वंशवादी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। केरल की तिरूवनंतपुरम सीट से कांग्रेस के चार बार के सांसद शशि थरूर इतने पर नहीं रूके। उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार के कारण यह विचार भारत की राजनीति में स्थापित हुआ कि राजनीतिक नेतृत्व जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है। इस तरह से उन्होंने देश की सभी प्रादेशिक पार्टियों में...

  • थरूर की आम पार्टी की कूटनीति

    कांग्रेस के तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर वैसे तो हर साल आम की पार्टी देते हैं। लेकिन इस बार की पार्टी कुछ खास थी। इस बार की पार्टी में राजनीति से ज्यादा कूटनीति दिखी। तभी ऐसा लगा कि थरूर अपनी पोजिशनिंग में लगे हैं। आमतौर पर उनकी पार्टी में सभी राजनीतिक दलों के नेता बुलाए जाते हैं। लेकिन इस बार उनकी पार्टी में बड़ी संख्या में राजनयिक आमंत्रित थे। दुनिया भर के देशों के दूतावासों के अधिकारियों और कर्मचारियों को थरूर ने बुलाया था और वे आए भी थे। कहा जा रहा है कि थरूर जब से पहलगाम कांड और...

  • थरूर को हकीकत का अहसास हुआ!

    कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर के बारे में कहा जा रहा है कि उनको हकीकत का अहसास हो गया है। उनको लगने लगा है कि भाजपा कुछ नहीं देने जा रही है क्योंकि अभी तक उनकी कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि वे केंद्र में मंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं और वह भी विदेश मंत्री। लेकिन इसका भरोसा कौन देगा? वह तो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं। लेकिन उससे पहले लोकसभा से इस्तीफा देकर उनको सांसद बनना होगा, जो कि अभी संभव नहीं है। ऊपर से यह...

  • अपनी ही पार्टी पर थरूर का बड़ा हमला

    नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर की अपनी पार्टी से दूरी बढ़ती जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने और केंद्र सरकार के डेलिगेशन की अगुवाई करने के बाद अब अपनी ही पार्टी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इमरजेंसी को भारत के इतिहास का एक  काला अध्याय बताया है। इमरजेंसी के समय जबरदस्ती नसबंदी कराए जाने को थरूर ने क्रूरता की मिसाल बताया है। तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने एक लेख में लिका है कि इमरजेंसी को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे सबक...

  • अब खड़गे और थरूर आपस में उलझे

    नई दिल्ली। केरल की तिरूवनंतपुरम सीट से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर का अपनी पार्टी के साथ विवाद खत्म ही नहीं हो रहा है। अभी तक कांग्रेस के छोटे मोटे नेता या प्रवक्ता आदि के साथ उनका विवाद हो रहा था। अब सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनका विवाद हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने प्रधानमंत्रीर नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के लिए बुधावर को शशि थरूर पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘मैं अंग्रेजी नहीं पढ़ सकता, लेकिन थरूर की लैंग्वेज बहुत अच्छी है। हमने उन्हें पार्टी की वर्किंग कमेटी का मेंबर बनाया है। पूरे विपक्ष...

  • थरूर ने कुछ कांग्रेस नेताओं से मतभेद की बात कही

    नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के नेता और तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कहा है कि अपनी पार्टी के कुछ नेताओं से उनके मतभेद है। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा केरल के ही कुछ नेताओं की ओर था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे जिन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं उनके बारे में मीडिया के लोग अच्छे से जानते हैं क्योंकि उनमें से कुछ मुद्दे सार्वजनिक डोमेन में हैं। थरूर ने हालांकि यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके सिद्धांत उन्हें पसंद हैं और उन्होंने 16 साल तक...

  • अमेरिका में क्या बात करके लौटे थरूर

    आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को एक्सपोज करने और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने के लिए दुनिया के 33 देशों के दौरे पर गए भारतीय डेलिगेशन लौट आए हैं। सात में से एक डेलिगेशन कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में गया था। यह सबसे हाई प्रोफाइल डेलिगेशन था, जिसे अमेरिका भेजा गया था। जाते हुए भी डेलिगेशन अमेरिका पहुंचा और कई लोगों से मिला और उसके बाद पनामा, कोलंबिया आदि देशों के दौरे से लौटते हुए भी यह डेलिगेशन अमेरिका रूका। लौटते समय शशि थरूर के नेतृत्व वाले डेलिगेशन के सदस्य अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वांस से...

  • थरूर के रास्ते में अभी बाधा है

    केरल की तिरूवनंतपुरम सीट से लोकसभा का चुनाव जीते शशि थरूर के बारे में माना जा रहा है कि वे एकदम भाजपा के दरवाजे पर खड़े हैं और किसी भी समय उनके लिए दरवाजा खुल सकता है। लेकिन सवाल है कि दरवाजा खुलेगा तो उनके लिए क्या भूमिका होगी? वे कांग्रेस से इसलिए नाराज हुए हैं क्योंकि कांग्रेस के पास अब उनको देने के लिए कुछ नहीं है। कांग्रेस सरकार में थी तो उनको मंत्री बनाया गया था। अब थरूर को लग रहा है कि कांग्रेस सरकार में नहीं आ रही है। इसलिए उन्होंने केरल में अपने को मुख्यमंत्री पद...

  • ये खुर्शीद और थरूर को क्यों कोस रहे?

    जो काम देशहित में तीन दशक पहले अटलजी ने बतौर विपक्षी नेता किया था, वही दायित्व अब कांग्रेस से सलमान खुर्शीद, शशि थरूर और मनीष तिवारी कर रहे है। परंतु कांग्रेस का प्रभावशाली हिस्सा, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी सहित कई पार्टी नेता शामिल है— उन्हें यह राष्ट्रीय कवायद रास नहीं आ रही है और वह अपने ही नेताओं को भारत का पक्ष रखने के लिए कोस रहे है। यह देश और कांग्रेस— दोनों का दुर्भाग्य है। आखिर सलमान खुर्शीद और शशि थरूर से कांग्रेस नेतृत्व नाराज क्यों है? उन्हें पार्टी का एक वर्ग किस ‘अपराध’ का दोषी...

  • शशि थरूर का कांग्रेस नेताओं को जवाब

    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी पार्टी के नेताओं को जवाब दिया है। थरूर ने अपनी निष्ठा पर सवाल उठा रहे लोगों को जवाब देते हुए कहा है कि देश के हित में काम करना, पार्टी के खिलाफ काम करना नहीं होता है। गौरतलब है कि कांग्रेस के अनेक नेता थरूर को भाजपा का करीबी कहने लगे हैं और उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगा रहे हैं। थरूर अमेरिका और कई अन्य देशों के दौरे पर गए भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जो लोग राष्ट्रहित में काम करने को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते...

  • उफ, ‘कैटल क्लास’ में शशि थरूर!

    ओह! थरूर का छा जाना। पर वे भला कब सुर्खियों में नहीं रहे? वे भी तो आखिर चौधरी देवीलाल की जुबां से बतलाए “काले कौवों” की जमात के प्रतिनिधि हैं। बुद्धिवानों की वह जमात, जो गुलामी के डीएनए में रची-पकी है। यह चिरकुटों की वह जमात है जो दिल्ली की बादशाही-अंग्रेज सत्ता हो या प्रधानमंत्रियों की लुटियन सत्ता, इन्हीं के तेल से ज्ञान का दीप जलाने के लिए शापित है। देश में आखिर बुद्धि का भला महत्व कहां है जो वह स्वतंत्र, स्वायत्त और खुद्दार बने? यह जमात कभी सोनिया गांधी के तराने गाती हैं तो कभी नरेंद्र मोदी से...

  • बिकने में हमारा सस्तापन!

    जरा हजार साला भारत इतिहास को याद करें! दिल्ली की सत्ता, बादशाहों, गवर्नर जनरलों को ललकारने वाले कितने ‘बुद्धिमान’ हुए? अर्थात दिल्ली के श्रेष्ठि-अमीर और लेखक, विद्वान वर्ग में कितने लोग बादशाह हुकुम से भिड़ने वाले हुए? याद करें इंदिरा गांधी के आपातकाल के समय को? क्या तब निर्भयी बुद्धि की मशालें थीं? तब भी लुटियन दिल्ली के “काले कौवों” की जमात का सत्य खुला कि– झुकने के लिए कहा था और रेंगने लगे! यही शशि थरूरों का, भारत का सार है। सत्तावान की आरती उतारना, उसके साथ फोटो खिंचाना, उससे कुछ खैरात, कोई ओहदा पाना देश का एक सामान्य...

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