कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर के बारे में कहा जा रहा है कि उनको हकीकत का अहसास हो गया है। उनको लगने लगा है कि भाजपा कुछ नहीं देने जा रही है क्योंकि अभी तक उनकी कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि वे केंद्र में मंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं और वह भी विदेश मंत्री। लेकिन इसका भरोसा कौन देगा? वह तो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं। लेकिन उससे पहले लोकसभा से इस्तीफा देकर उनको सांसद बनना होगा, जो कि अभी संभव नहीं है। ऊपर से यह भी साफ हो गया है कि भाजपा उनको मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाने जा रही है।
असल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर अपनी अलग बिसात बिछा रहे हैं। उन्होंने केरल की कमेटी में एक मुस्लिम और तीन ईसाई पदाधिकारी बनाए हैं और इसके अलावा 10 पिछड़े और दलित रखे हैं। ऊपर से भाजपा ने अपने पुराने नेता और सीपीएम विरोध की राजनीति का प्रतीक चेहरा रहे सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा में मनोनीत कर दिया है। सुरेश गोपी त्रिशुर से भाजपा के सांसद हैं और केंद्र में मंत्री हैं। ऐसे में शशि थरूर से भीड़ बढ़ेगी। लेकिन मुश्किल यह है कि थरूर को अगर इस हकीकत का अहसास हो भी गया तो क्या होगा? कांग्रेस में तो वे अपनी जगह गंवा चुके हैं। एक समय वे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बहुत प्रिय थे। सोनिया और राहुल गांधी तक उनकी सीधा पहुंच थी। लेकिन अति महत्वाकांक्षा में उन्होंने सबको नाराज कर दिया। बाकी काम राहुल गांधी के साथ गोंद की तरह चिपके केरल के नेता केसी वेणुगोपाल ने कर दिया।


