प्रशांत किशोर ने चुनाव जीतने के बाद बांकीपुर के विधायक के रूप में शपथ नहीं ली थी तभी भाजपा के नेताओं ने उन पर हमला शुरू कर दिया था। गिरिराज सिंह जैसे लोगों ने तंज शुरू कर दिया था कि बांकीपुर को कैसे बेंगलुरू बनाएंगे प्रशांत किशोर। खैर उन लोगों की बातों पर प्रशांत ने ध्यान नहीं दिय़ा। चुनाव जीतने के बाद वे दो तीन दिन के लिए दिल्ली, मुंबई दौरे पर थे। लौट कर उन्होंने धन्यवाद यात्रा शुरू की है। वे बांकीपुर में घूम रहे हैं और लोगों का आभार जता रहे हैं कि उन्होंने उनको वोट दिया। इसके साथ साथ वे अपने चुनाव क्षेत्र के प्रबंधन का एक मॉडल भी तैयार कर रहे हैं। निश्चित रूप से यह मॉडल प्रदेश के बाकी 242 विधायकों के लिए मुश्किल खड़ी करने वाला है।
प्रशांत किशोर ने धन्यवाद यात्रा के पहले भाषण में कहा कि वे अगले एक से दो साल में बांकीपुर के 10 हजार युवाओं को कहीं न कहीं नौकरी दिलाएंगे। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर उनका बच्चा पढ़ लिख कर घर बैठा है, नौकरी नहीं मिल रही है तो लोग उनका बढ़िया बाटोडाटा बनाएं और उनके कार्यालय में जमा करें। उन्होंने कहा कि वे देश के बड़े लोगों से अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर सबको उनकी योग्यता के हिसाब से फैक्टरी या ऑफिस में काम दिलाएंगे। उन्होंने यह भी कहा उनका कार्यालय सुनिश्चित करेगा कि हर गरीब में पूरा पांच किलो अनाज मिले और जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के योग्य हैं उनको पूरा 11 सौ रुपया पेंशन मिले। वे 24 घंटे काम करने वाला कार्यालय बना रहे हैं। अगर उन्होंने नौकरी दिलानी शुरू कर दी तो तय मानें कि पूरे बिहार में उनके प्रति सद्भाव बनेगा। अभी ही लोगों में चर्चा शुरू हो गई है कि नेता ऐसा होना चाहिए, जो अपनी क्षमता का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए करे।
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