राजनीति में प्रोपेगेंडा के लिए स्पिन देने का खेल बहुत जरूरी होता है। दुनिया में पब्लिक रिलेशंस की शुरुआत करने वाले एडवर्ड एल बार्नेस की जीवनी का नाम ‘फादर ऑफ स्पिन’ है। पहले विश्वयुद्ध के समय में वे अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन के साथ काम कर रहे थे। भारत में राजनीतिक दल प्रोपेगेंडा के लिए ऐसे लोगों को रखते हैं, जो किसी भी बात को मनमाने तरीके से स्पिन दे सकें। इन दिनों यह खेल खूब देखने को मिल रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों एक दूसरे के एजेंडे को फेल करने के लिए खबरों को स्पिन दे रहे हैं।
इसकी दो मिसाल दी जा सकती है। पहली तो एक नवंबर की कांग्रेस की रैली का है। कांग्रेस ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद दोबारा से एसआईआर और वोट चोरी का मुद्दा पकड़ा है। उसने कई दिन के प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस से एक नवंबर की रैली की इजाजत मांगी। लेकिन भाजपा ने इसे स्पिन दे दिया कि सिख विरोधी दंगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए कांग्रेस ने एक नवंबर की रैली रखी है। इसे पंजाब विधानसभा चुनाव में फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह व्यापारियों के नुकसान से भी इसे जोड़ा गया। दूसरी ओर भाजपा को एक टैग लाइन मिली कि ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ तो राहुल गांधी ने उसे स्पिन दिया कि मोदी कहीं जा भी नहीं सकते हैं, हम उनको कहीं जाने नहीं देंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



