पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का रिहर्सल हुआ है। आठ नगर निगम, 75 नगर परिषद और 20 नगर पंचायतों के लिए मंगलवार, 26 मई को मतदान हुआ। लोगों ने अच्छा खासा उत्साह दिखाया और 61 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। यह चुनाव सभी पार्टियों के लिए परीक्षा का चुनाव है। मुख्यमंत्री भगवंत मान भले बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन इस चुनाव के नतीजों से पता चलेगा कि अगले साल मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कौन कितना तैयार है। मान ने पिछले दिनों एक टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में कहा कि अगले साल के चुनाव में कांग्रेस की संख्या दहाई में नहीं पहुंचेगी, जबकि अकाली दल और भाजपा का खाता नहीं खुलेगा।
उन्होंने पिछली बार से बड़ी जीत का दावा किया है। पिछली बार आम आदमी पार्टी को राज्य की 117 में से 92 सीटें मिली थीं। लेकिन अभी उनकी पार्टी टूटी है और पंजाब के छह राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ कर गए हैं। वे सभी भाजपा में शामिल हो गए हैं। सो, भाजपा भी एक ताकत के तौर पर मैदान में है और अकाली दल व कांग्रेस तो पहले से हैं। अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब दे भी तैयारी कर रही है। तभी स्थानीय निकाय का चुनाव परीक्षा की तरह है। इसके नतीजे 29 मई को आएंगे। आम आदमी पार्टी की कोशिश इस चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने की है ताकि वह राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर हुए असर को कम कर सके। केंद्रीय एजेंसियों की लगातार कार्रवाई से भी आप के नेता और करीबी कारोबारी परेशान हैं।
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