राहुल गांधी ने अपनी राजनीति के शुरुआती दिनों में पार्टी संगठन को लोकतांत्रित बनाने के लिए चुनाव का तरीका निकाला था। उन्होंने प्रदेशों में पार्टी की यूथ विंग और छात्र शाखा एनएसयूआई के अध्यक्षों के चुनाव कराए थे। उस समय कांग्रेस पार्टी केंद्र की सरकार में थी इसलिए इन चुनावों का खूब माहौल बना था। हालांकि यह प्रयोग बुरी तरह से फेल हो गया था। हर राज्य में पार्टी के बड़े नेताओं के बेटे, बेटियों ने किसी तरह से चुनाव जीत लिए थे। बाद में राहुल ने इस तरह से नेता चुनने की प्रक्रिया समाप्त कर दी थी। हालांकि उसके बाद भी वे अपनी पसंद से ही नेता चुनते हैं और ज्यादातर ऐसे गुमनाम चेहरों को आगे करते हैं, जिनसे पार्टी के पुराने नेता असहज हो जाते हैं।
अब वे कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई का अध्यक्ष चुन रहे हैं। इस बार चुनाव की बजाय उन्होंने नेताओं की परीक्षा ली है। यह परीक्षा ग्रुप डिस्कशन और सवाल जवाब की शक्ल में हुई। मंगलवार को राहुल गांधी देश भर के 15 युवा नेताओं से मिले। राहुल के साथ एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार भी मौजूद थे। इसमें राहुल ने नेताओं के बीच चर्चा कराई और उनसे कांग्रेस के बारे में सवाल पूछे। राहुल ने कांग्रेस की विचारधारा के बारे में पूछा तो साथ साथ देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बारे में भी सवाल जवाब हुए। कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि जल्दी ही वरुण चौधरी की जगह एनएसयूआई का नया अध्यक्ष नियुक्त होगा। पहले कांग्रेस के बड़े नेता युवा नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखते थे, जनता के बीच उनके काम को ऑब्जर्व करते थे और क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरण के हिसाब से उनको पद देते थे। लेकिन राहुल का अपना तरीका है।
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