ऐसा लग रहा था कि हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर के करियर समाप्त हो जाएगा। लेकिन वे अर्ध सैनिक बल आईटीबीपी के प्रमुख बन गए। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन सिंह की आत्महत्या के बाद उनका नाम विवादों में घिरा था। पूरन सिंह ने अपने सुसाइड नोट में कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे पूरी हरियाणा पुलिस विवादों में घिरी थी। उस समय शत्रुजीत कपूर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी थे। उनको हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का बेहद नजदीकी माना जाता है।
जानकार सूत्रों का कहना है कि वाई पूरन सिंह मामले में भी विवादों में घिरने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण यह था कि खट्टर का समर्थन उनके पीछे था। उस समय यह भी चर्चा थी कि खट्टर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शत्रुजीत कपूर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन जिस दिन नितिन नबीन का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए घोषित हुआ उसके अगले ही दिन कपूर की विदाई हो गई। तभी उनका करियर समाप्त होने की अटकलें लगने लगी थीं। लेकिन लग रहा है कि खट्टर का समर्थन उनके काम आया। वे एक बड़े अर्धसैनिक बल का प्रमुख हो गए।


