तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी जब कई दिन तक दिल्ली में थीं तो विपक्षी गठबंधन के नेताओं से उनकी मुलाकात हुई। वे ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में भी शामिल हुईं और बाद में सोनिया गांधी से अकेले भी मिली थीं। उससे पहले वे अरविंद केजरीवाल से अकेले मिली थीं। सो, कहा नहीं जा सकता है कि उनको केजरीवाल ने सलाह दी या सोनिया गांधी ने लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं का मानना है कि ममता ने सलाह को गंभीरता से लिया और अभी लड़ने के बजाय सारे मामलों के ठंडा होने तक शांत रहने का फैसला किया है। उसके बाद से ही ममता बनर्जी और अभिषेक दोनों बिल्कुल शांत हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से लगातार उकसावे वाली कार्रवाई हो रही है। ऐसे में ममता बनर्जी चुप बैठने वाली नेता नहीं हैं। वे सड़क पर उतर कर लड़ने वाली नेता हैं। लेकिन उनको समझाया गया है कि अभी जनभावना पक्ष में नहीं है और भाजपा भी उसको भड़का रही है। इसलिए वे शांत रहें और अपने को विक्टिम की तरह प्रोजेक्ट करें। तभी पीए की तलाश में पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के घर पर आधी रात के बाद छापा मारा तो अभिषेक ने भी अपने को विक्टिम की तरह पेश किया। ममता बनर्जी को यह बात समझ में आई है कि लोगों में कितनी भी नाराजगी हो थोड़े समय के बाद वे भूल जाते हैं। लोगों ने इंदिरा गांधी की गलती भुला दी थी। इसलिए ममता बनर्जी अभी मामला ठंड़ा पड़ने का इंतजार कर रही हैं।


