कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा के अनुशासन और एक नेता के प्रति सबके समर्पण को लेकर भाजपा और संघ का मजाक उड़ाते हैं। लेकिन असल में कांग्रेस में भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा भाजपा में है। कांग्रेस में भी आलाकमान के खिलाफ बोलने या उससे अलग राय रखने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। उनको भी किनारे कर दिया जाता है। लोकसभा में पेपर लीक बिल पर हुई चर्चा में जिस तरह से कांग्रेस के कुछ अच्छे वक्ताओं और शिक्षा पर लिखने, बोलने वालों को चर्चा से दूर रखा गया उससे भी यह साबित हुआ है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी दोनों को चर्चा में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला।
शशि थरूर न सिर्फ अच्छे वक्ता हैं, बल्कि वे लगातार शिक्षा और परीक्षा की व्यवस्था पर लिखते रहे हैं। उन्होंने आंदोलन के दौरान इस विषय पर बहुत अच्छे लेख लिखे। इसी तरह मनीष तिवारी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में काम रोको प्रस्ताव दिया था और इस पर चर्चा की मांग की थी। लेकिन इन दोनों को वक्ताओं में शामिल नहीं किया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बोलें तो समझ में आता है। लेकिन हर बार वही गौरव गोगोई, वही दीपेंद्र हुड्डा और वही केसी वेणुगोपाल बोलते हैं। असल में मनीष तिवारी ने पिछले दिनों कई ऐसे बयान दिए, जो कांग्रेस आलाकमान को पसंद नहीं आए होंगे। ऊपर से चंडीगढ़ में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर मौजूद थे। ऐसे ही थरूर ने केरल चुनाव से पहले जो बयान दिए थे वो भी कांग्रेस आलाकमान के यहां रजिस्टर में दर्ज होगा।
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