केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक तरह से साफ कर दिया है कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का बिल केंद्र सरकार नहीं लाने जा रही है। उन्होंने संविधान पर दो दिन तक राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्यों में समान नागरिक संहिता का कानून लागू किया जाएगा। अमित शाह ने उत्तराखंड की मिसाल दी और कहा कि जिस तरह से उत्तराखंड में यूसीसी को लागू किया गया है उसी तर्ज पर भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि एक एक करके भाजपा शासित राज्य यह बिल अपने यहां विधानसभा में पास करेंगे।
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भाजपा ने पिछले दिनों झारखंड विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि उसकी सरकार बनी तो वह समान नागरिक कानून लागू करेगी और आदिवासियों को उससे बाहर रखेगी। कुछ दिन पहले जब उत्तराखंड में कानून लागू हुआ तब असम सरकार ने उसी ड्राफ्ट के आधार पर अपने यहां बिल लाने का ऐलान किया था। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में यह बिल आ सकता है।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कमेटी की सिफारिशों के आधार पर उत्तराखंड का कानून बना तो विधि आयोग के सदस्यों ने भी उस कमेटी के लोगों से मुलाकात की थी। तब कहा जा रहा था इसी मसौदे के आधार पर केंद्र सरकार भी बिल लाएगी। लेकिन अब लगता है कि केंद्र सरकार फिलहाल पीछे हट गई है। वह राज्यों के जरिए ही इसे लागू करेगी।
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