इस बार ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में कम से कम एक या दो सीट का अतिरिक्त फायदा होगा। लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड के घटनाक्रम के बाद ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस को कोई लाभ नहीं होने वाला है। गौरतलब है कि कांग्रेस के इस बार चार सांसद रिटायर हो रहे थे और अंदाजा लगाया जा रहा है कि कांग्रेस को पांच सीटें मिल जाएंगी। गुजरात में उसे एक सीट का नुकसान हो रहा था क्योंकि शक्ति सिंह गोहिल रिटायर हो रहे थे और कांग्रेस वहां जीतने की स्थिति में नहीं थी।
लेकिन कांग्रेस को अंदाजा था कि वह मध्य प्रदेश में सीट बचा लेगी और कर्नाटक में दो अतिरिक्त सीट जीत लेगी। राजस्थान में भी उसे एक सीट मिलने का यकीन था। इसके अलावा जब झारखंड में हेमंत सोरेन और तमिलनाडु में एमके स्टालिन एक सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने पर राजी हो गए तो लगा कि कांग्रेस को दो सीट का फायदा हो सकता है। कर्नाटक और राजस्थान में तो चीजें कांग्रेस के हिसाब से हो गईं। लेकिन मध्य प्रदेश और झारखंड में मामला उलझ गया। मध्य प्रदेश में तो मीनाक्षी नटराजन की पक्की सीट पर उनका नामांकन ही खारिज हो गया और अंतिम समय में उतारे गए भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का रास्ता साफ हो गया। ऐसे ही झारखंड में भाजपा ने निर्दलीय परिमल नाथवानी को समर्थन दे दिया, जिससे कांग्रेस के प्रणब झा का रास्ता मुश्किल हो गया। सो, कांग्रेस ने सात उम्मीदवार दिए और ले देकर उसमें से पांच जीत रहे हैं। दो का मामला फंसा हुआ है।


