पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही पार्टियों ने अगले साल के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसमें भाजपा सबसे अव्वल है और हर राज्य की प्रादेशिक पार्टियां भी उसके मुकाबले के लिए तैयारी कर रही हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस बार कांग्रेस ने भी समय से पहले शुरुआत की है। कांग्रेस पार्टी ने भी राज्यों में चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। खास कर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तैयारी अभी से शुरू हो गई है, जहां अगले साल मार्च में विधानसभा का चुनाव होना है। जनवरी के अंत तक चुनाव की घोषणा हो जाएगी। इसका अर्थ है कि अब सात महीने का समय बचा है। पहले दौर में पांच राज्यों, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव है। इनमें से उत्तर प्रदेश छोड़ कर कांग्रेस बाकी चार राज्यों में चुनाव जीत कर सरकार बनाने की संभावना देख रही है। लेकिन अभी बताया जा रहा है कि उसका फोकस उत्तर प्रदेश पर है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछला लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिल कर लड़ा था। सपा ने कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं, जिनमें से कांग्रेस छह पर जीती। यानी औसत 33 फीसदी जीत का रहा। दूसरी ओर सपा 63 सीटों पर लड़ कर 37 पर जीती। यानी उसका औसत 60 फीसदी जीत का रहा है। तभी सपा के नेता चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन रहे लेकिन सपा ज्यादा सीटों पर लड़े। लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं ने अभी से एक सौ से ज्यादा सीट की दावेदारी शुरू कर दी है। केरलम में सरकार गठन के तुरंत बाद राहुल गांधी दो दिन के रायबरेली दौरे पर पहुंचे। कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने नेताओं के साथ मीटिंग शुरू कर दी है। प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने प्रदेश कमेटी से हर सीट पर पांच संभावित उम्मीदवारों के नाम देने को कहा है। पहले चरण में कांग्रेस 22 सौ से ज्यादा नाम मंगा रही है। उसके बाद वह एक सौ से 102 सीट पर फोकस करेगी। हर सीट पर पहले पांच और फिर तीन सीरियस उम्मीदवारों की सूची बनेगी। दूसरी ओर सपा का कहना है कि सीटों का संख्या पर तो आगे बात हो जाएगी लेकिन कांग्रेस अगर गठबंधन के लिए अनुकूल सीटों पर ही दावेदारी कर देगी तो मुश्किल होगी। यानी नंबर्स से ज्यादा क्वालिटी सीट पर विवाद होगा।


