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टुकड़ों टुकड़ों में ‘कामराज प्लान’

पिछले कई महीनों से इस बात की चर्चा चल रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में फेरबदल करने वाले हैं। जून के महीने में यह चर्चा सबसे तेज थी, जब उनकी सरकार के दो साल पूरे हो रहे थे। जब उस समय बदलाव नहीं हुआ तो कहा गया कि संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले होगा। उसके बाद मोदी के जन्मदिन से लेकर उनके सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के मौके को भी मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए मार्क किया गया। इस बीच उनकी सरकार में लगातार वैकेंसी क्रिएट होती रही। मंत्रियों के इस्तीफे होते रहे। अभी एक और वैकेंसी हो गई है। सूचना व प्रसारण और संसदीय कार्य राज्यमंत्री एल मुरुगन ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के कारण इस्तीफा हुआ था और धर्मेंद्र प्रधान का कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की वजह से इस्तीफा हुआ था। यानी चार मंत्रियों के इस्तीफे हो चुके हैं।

इनके अलावा तीन मंत्री दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पीयूष गोयल मंत्री होने के साथ साथ पार्टी के कोषाध्यक्ष बना दिए गए हैं। दो अन्य मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली का अध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में चार महीने में विधानसभा चुनाव हैं। दो और मंत्रियों को इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा गया है। हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। अगर इन दो मंत्रियों का भी इस्तीफा होता है तो छह मंत्री पद खाली होंगे। दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे तीनों या कम से कम दो मंत्रियों का इस्तीफा होगा। इस तरह आठ या नौ वैकेंसी क्रिएट हो रही है। पहले से ही कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं।

इस बीच यह भी चर्चा हो रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘कामराज प्लान’ पर काम कर रहे हैं। ध्यान रहे के कामराज ने नेहरू मंत्रिमंडल को नया रूप देने के लिए एक योजना बनाई थी। इस योजना के तहत बड़ी संख्या में मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। इस योजना का मकसद कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाना था। तभी नेहरू की पसंद के मंत्रियों ने भी इस्तीफा दिया था और बाद में उनको फिर से मंत्री बना लिया गया था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ‘कामराज प्लान’ कारगर नहीं हो रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों से इस्तीफा देने को कहा गया है। हालांकि यह तय नहीं है कि सीधे प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के स्तर से इस्तीफे को कहा गया लेकिन यह खबर है कि मंत्रियों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। वरिष्ठ मंत्री और नेता यह मानने को तैयार नहीं है कि मंत्रिमंडल को नया रूप देने के लिए उनका इस्तीफा चाहिए। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री तो खुद ही 76 साल के हो गए हैं। अगर वे रह सकते हैं तो उनसे कम उम्र के मंत्रियों को क्यों हटाया जाना चाहिए। तभी ऐसा लग रहा है कि ‘कामराज प्लान’ अटक गया है और इसलिए मजबूरी में ऐसे नेताओं के इस्तीफे हो रहे हैं, जिनका कोई बड़ा राजनीतिक असर नहीं है। कुरियन केरल के ईसाई हैं तो बिट्टू कांग्रेस से भाजपा में आए थे और मुरुगन तमिलनाडु के हैं, जहां भाजपा का कुछ दांव पर नहीं है। असली बात तो तब होगी, जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आदि का इस्तीफा हो।

By NI Political Desk

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