राजनीति में भी जैसे को तैसा चलता रहता है। कांग्रेस पार्टी ने तमिलनाडु में गठबंधन की बड़ी पार्टी डीएमके पर दबाव बनाया कि उसे ज्यादा सीटें दी जाएं और सरकार में भी हिस्सेदारी दी जाए तो उधर केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने कांग्रेस के ऊपर दबाव बना दिया है। मुस्लिम लीग ने कांग्रेस से ज्यादा सीटों की मांग की है। सरकार में मुस्लिम लीग हमेशा शामिल होती है इसलिए तमिलनाडु जैसी समस्या नहीं है। लेकिन सीटों को लेकर टकराव शुरू हो गया है। मुस्लिम लीग के नेताओं की एक अहम बैठक इस हफ्ते के शुरू में कोझीकोड में हुई थी, जिसमें ज्यादा सीटें मांगने का फैसला हुआ। असल में स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन से उत्साहित होकर मुस्लिम लीग ने ज्यादा सीटों की मांग शुरू की है।
दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में मुस्लिम लीग के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। मालाबार क्षेत्र से बाहर भी उसके प्रतिनिधि जीते और उसका असर दिखा। अभी तक पार्टी मल्लापुरम में मजबूत मानी जाती थी लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में कासरगौड़, कन्नूर और पथानामिट्ठा में भी उसके प्रतिनिधि जीते। पिछले विधानसभा चुनाव में मुस्लिम लीग 25 सीटों पर लड़ी थी और 15 पर जीत हासिल की। इसकी तुलना में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। स्ट्राइक रेट के आधार पर भी मुस्लिम लीग ज्यादा सीट मांग रही है। पार्टी के राज्य महासचिव पीएमए सलाम ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि उनकी पार्टी ज्यादा सीटों की मांग करेगी।


