जी हां, ये मोदी और अमित शाह की पुलिस है, जो प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाती है और उसके बाद खुद को विक्टिम बताती है, रोते-कलपते वीडियो बनाती है, अपने परिजनों से अपील करवाती है और अगर उसके ऊपर महिलाओं से बदसलूकी का आरोप लगे तो आरोप लगाने वालों पर एससी, एसटी एक्ट में केस कर देती है। इससे पहले कभी और कहीं की पुलिस ने ऐसा काम नहीं किया होगा। दिल्ली के एक एसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विवेक भगत ने तीन पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी एक्ट में केस दर्ज करा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने उनके लिए जातिसूचक शब्द कहे और उनको अपमानित किया है। गौरतलब है कि डीसीपी विवेक भगत तीन अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान एक दूसरे विवाद में फंसे थे। एक महिला पत्रकार ने उनके ऊपर आरोप लगाया था कि भगत ने उनके ऊपर यौन हमला किया। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा। इस विवाद के बाद विवेक भगत ने डीसीपी का अतिरिक्त चार्ज लेने से मना कर दिया था।
अब उस घटना के 11 दिन के बाद विवेक भगत ने तीन महिला पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। यानी जिन महिला पत्रकारों ने अपने ऊपर यौन हमले का आरोप लगाया उनके ऊपर दिल्ली पुलिस के एसीपी ने एससी, एसटी एक्ट में केस कर दिया है। इस तरह के मामले पहले भारत के दूरदराज के गांवों से आते थे। जहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न या एससी, एसटी एक्ट के तहत लोगों को फंसाने या इन कानूनों के दुरुपयोग के मुकदमे होते थे। अब दिल्ली में पुलिस के बड़े अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करा रहे हैं!
मामला इतना भर नहीं है। जंतर मंतर के प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारियों का वीडियो बनवाया गया और एक बेहद मार्किक गीत लगा कर उसे जारी किया गया, जिसमें दिल्ली पुलिस को पीड़ित दिखाया जा रहा है। 20 जुलाई के प्रोटेस्ट के बाद भी पुलिस वालों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करा कर पुलिस को पीड़ित दिखाया गया था। हालांकि इसकी एक व्याख्या यह भी है कि पुलिस की बर्बरता को जस्टिफाई करने के लिए यह सब हो रहा है।
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