राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

यूपी में महिला नेताओं का मुकाबला दिखेगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अविवाहित हैं। इसलिए उनके चुनाव प्रचार में परिवार के सदस्य नहीं दिखते हैं, जैसा आमतौर पर दूसरे नेताओं के प्रचार में दिखता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला नेताओं का मुकाबला नहीं होगा। इस बार यूपी में जिस तरह से राज्य सरकार ने महिलाओं को एक वोट वर्ग के रूप में देखा है और उनके लिए योजनाएं शुरू की हैं उससे लग रहा है कि आधी आबादी इस बार चुनाव प्रचार के केंद्र में है। यह अभी से दिखने भी लगा है। समाजवादी पार्टी से लेकर राष्ट्रीय लोकदल तक के सर्वोच्च नेताओं के परिवार के सदस्य चुनाव मैदान में उतर गए हैं।

एक तरफ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव हैं तो दूसरी ओर रालोद के अध्यक्ष जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी हैं। दोनों ने प्रचार शुरू कर दिया है। डिंपल को खैर कई बार की सांसद हैं। लेकिन अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी के बाद सहारनपुर में रालोद की रैली हुई, जिसमें चारू चौधरी ने जोरदार भाषण दिया और लोगों से चौधराहट बनाए रखने की अपील की। डिंपल और चारू चौधरी के अलावा कई और महिला नेता इस बार पहले से ज्यादा सक्रिय दिखेंगी। खबर है कि बसपा की प्रमुख मायावती अपने दोनों भतीजों आकाश और ईशान आनंद की बजाय भतीजी दीपिका को आगे कर रही हैं। उनको इस बार यूपी के लोग चुनाव प्रचार में देख सकते हैं।

अपना दल की अनुप्रिया पटेल और अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल पहले से राजनीति में हैं और इस बार भी दोनों बहनों की पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ लड़ेंगी। प्रियंका गांधी वाड्रा भले केरल की वायनाड सीट से लोकसभा सांसद हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उनकी सक्रियता इस बार भी रहेगी और भाजपा की नई बनी महामंत्री स्मृति ईरानी भी इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगी। कहा जा रहा है कि एक बार फिर वे अमेठी और रायबरेली में भी सक्रिय होंगी।

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment