यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की चर्चा हो रही है। जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से होली के दिन कथित रूप से जले हुए नोट बरामद होने की घटना के डेढ़ साल हो गए। लेकिन यह पता ही नहीं चल रहा है कि इस मामले में क्या होना है? सुप्रीम कोर्ट ने घटना के तुरंत बाद एक कमेटी बना कर जांच कराई थी, जिसने कहा था कि नोट उनके घर से बरामद हुए थे। उसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों ने उनकी नियुक्ति का बड़ा विरोध किया। उन्हें बिना कोई काम दिए अदालत में रखा गया। इधर संसद में महाभियोग का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और जजेज इन्क्वायरी एक्ट के हिसाब से स्पीकर ने जांच की कमेटी भी बना दी। कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा भी दे दिया। सवाल है कि क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है? एक रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट और भारत सरकार के न्याय विभाग के रिकॉर्ड में वे आज भी जज हैं। अगर ऐसा है तो इसका अर्थ है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। तब भी सवाल है कि क्या वे महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे? अगर ऐसा होगा तो वे देश के पहले जज होंगे, जो महाभियोग के जरिए हटाए जाएंगे। यह भी सवाल है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हो जाएगा तो क्या महाभियोग की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी?
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