राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन चल रहा था। अब उसकी रिपोर्ट आ गई है। बताया जा रहा है कि सीपीएम ने विधानसभा चुनाव हारने के कारण तलाश लिए हैं। सीपीएम का मानना है कि विजयन के चेहरे पर प्रचार केंद्रित करना चुनाव हारने का एक बड़ा कारण था। इसके अलावा विजयन की सॉफ्ट हिंदुत्व की नीति भी हार का कारण बनी।

गौरतलब है कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर हमेशा दो सत्ता केंद्र रहे हैं। प्रकाश करात एक स्थायी केंद्र थे, जो अब भी हैं। विजयन को उनका करीबी माना जाता है। केंद्र में सीताराम येचुरी के कमजोर होने और फिर उनके निधन के बाद करात खेमा बहुत मजबूत हुआ। उधर केरल में भी विजयन के मुख्यमंत्री बनने के बाद से करात खेमे की पकड़ सत्ता और संगठन दोनों पर हो गई। वीएस अच्युतानंदन की उम्र बहुत हो गई थी और केंद्र में येचुरी कमजोर हो गए थे। उसके बाद करात और विजयन के कंट्रोल में ही पार्टी रही। तभी प्रचार के केंद्र में विजयन को रखा गया। यह भी एक तथ्य है कि केरल और पश्चिम बंगाल दोनों जगह लीपीएम को हिंदुओं के वोट मिलते रहे हैं। इसी सोच में विजयन ने केरल में हिंदू वोटों की ज्यादा आस लगा ली। वे केंद्र की नीतियों का समर्थन करने लगे और एझवा नेता नतेशन के साथ घूमने लगे। इससे मुस्लिम और ईसाई दोनों सीपीएम से दूर हुए और दूसरी ओर हिंदू वोटों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ चला गया।

Tags :

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment