यह लाख टके का सवाल है कि स्थानीय निकायों के चुनाव के बाद अजित पवार क्या करेंगे? उन्होंने जैसे तेवर दिखाए हैं उसे लेकर भाजपा के नेता परेशान हैं। उन्होंने भाजपा के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और अपने को पाक साफ बताते हुए भाजपा का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि ‘जिन लोगों ने मेरे ऊपर 70 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया वे आज मेरे साथ गठबंधन में शामिल हैं’। इसके अलावा उन्होंने पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम में भ्रष्टाचार के लिए सीधे भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। भाजपा के लिए दोनों बातें हैरान करने वाली थीं। तभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने उन पर निशाना साधा तो कहा कि क्या अजित पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं? सवाल है कि अजित पवार को इतना हौसला कहां से आया है? क्या वे समझ रहे हैं कि भाजपा से तालमेल कर लेने या कुछ आरोपों में क्लीन चिट हासिल कर लेने से वे हमेशा के लिए बच गए हैं?
उन्होंने 70 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का जिक्र करके भाजपा के सबसे बड़े नेताओं को चिढ़ा दिया है। अमित शाह ने उनको जेल भेजने और चक्की पिसवाने की बात कही थी। तभी बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी सहित 29 नगरीय निकायों के चुनाव के नतीजों से ज्यादा अहम यह है कि चुनाव के बाद का राजनीतिक परिदृश्य क्या होगा? यह दिलचस्पी अजित पवार के तेवर की वजह से है तो साथ ही साथ उनके अपने चाचा शरद पवार से तालमेल की वजह से भी है। उन्होंने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में शरद पवार की एनसीपी के साथ तालमेल किया है। पूरा परिवार इस चुनाव में एक साथ आ गया है और एक सार्वजनिक मंच से दोनों ने देश के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी गौतम अडानी के साथ अपनी नजदीकी का प्रदर्शन भी किया है। इसके बाद भाजपा के आशीष सेलार ने कहा कि सावरकर के विचारों का सम्मान भाजपा की सभी सहयोगी पार्टियों को भी करना चाहिए तब अजित पवार की पार्टी ने कहा कि वह शाहू, फुले और अंबेडकर के विचारों को मानती है। तभी चुनाव बाद यानी 16 जनवरी को नतीजे आने के बाद की राजनीति ज्यादा दिलचस्प होने वाली है।
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