कायदे से तो सबसे ज्यादा घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में होने चाहिए। उसके बाद असम में। फिर त्रिपुरा में। लेकिन ऐसा नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जो पैमाना बताया है उसके हिसाब से सबसे ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए उत्तर प्रदेश में हैं। असल में अमित शाह ने उन सभी लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया माना है, जिन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ से मुलाकात नहीं की या निर्धारित पते पर नहीं मिले या निर्धारित पते पर दिए गए फॉर्म को भर कर वापस नहीं लौटाया। ऐसे लोगों की संख्या तीन करोड़ बताई जा रही है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग चार श्रेणियों में मतदाताओं के नाम काट रहा है। ‘एब्सेट, शिफ्टेड, डेड एंड डुप्लीकेट’ यानी ‘एएसडीडी’। इसमें से केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के अन्य नेता भी एब्सेंट मतदाताओं को घुसपैठिया मान रहे हैं। उनका कहना है कि जो अपने निर्धारित पते पर नहीं मिला या जिसने बीएलओ को एप्रोच नहीं किया वह घुसपैठिया है। ऐसे लोगों का ही आंकड़ा तीन करोड़ बनता है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश में 84.73 लाख यानी 85 लाख लोग हैं। अगर केंद्रीय गृह मंत्री की बात मानें तो उत्तर प्रदेश में 85 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। यह तीन करोड़ के राष्ट्रीय औसत से भी बहुत ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर अगर 50 में एक व्यक्ति घुसपैठिया है तो उत्तर प्रदेश में औसतन 20 में से एक व्यक्ति घुसपैठिया निकलेगा। उत्तर प्रदेश में ‘एएसडीडी’ के अलावा एक अन्य की श्रेणी भी है, जिसमें करीब 10 लाख लोगों के नाम कटे हैं। उन्हें भी अगर घुसपैठिया मान लिया जाए तो आंकड़ा 95 लाख पहुंच जाएगा। यानी 15 करोड़ में करीब एक करोड़ घुसपैठिए यूपी में थे!
सोचें, उत्तर प्रदेश में 10 साल से भाजपा की सरकार है। योगी आदित्यनाथ की सरकार है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश से मुस्लिम माफिया का राज खत्म कर दिया है। लेकिन उनके राज्य में 15 में से एक वयस्क बांग्लादेशी घुसपैठिया है और उनको इसका पता ही नहीं है! अगर असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की बात करें तो तीन राज्य मिला कर भी कथित घुसपैठियों की संख्या 50 लाख नहीं पहुंचती है।
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