दो साल पहले राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव में जब कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा को राज्यसभा की सीट नहीं मिली थी तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से पोस्ट लिख कर अपनी तकलीफ जाहिर की थी। उन्होंने लिखा था कि शायद तपस्या में कोई कमी रह गई थी। इस बार ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी उनकी तपस्या का फल देना चाहती है। तभी खबर है कि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार की रात को चेन्नई में डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से एक राज्यसभा सीट की मांग की तो उन्होंने पवन खेड़ा को उच्च सदन में भेजने की बात कही।
वैसे वेणुगोपाल विधानसभा की सीटें बढ़वाने के लिए गए थे लेकिन बात नहीं बनी तो उन्होंने अपने 18 विधायकों के दम पर एक राज्यसभा सीट की मांग कर दी। लेकिन सवाल है कि कांग्रेस पार्टी पवन खेड़ा को तमिलनाडु से क्यों राज्यसभा में लाना चाहती है? तमिलनाडु में दो महीने में चुनाव है और वहां द्रविड और बाहरी का विवाद बहुत ज्यादा रहता है। स्टालिन तमिल अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं फिर उत्तर भारत के किसी नेता को कैसे राज्यसभा भेजेंगे? तभी यह भी कहा जा रहा है कि कहीं कांग्रेस पवन खेड़ा के सामने दिखावा तो नहीं कर रही है? अगर वह सचमुच गंभीर है तो तीन महीने बाद मई में राजस्थान की तीन सीटों के लिए चुनाव होंगे, जहां से कांग्रेस को एक सीट मिलेगी। वहां से पवन खेड़ा को भेजा जा सकता है। मई में मध्य प्रदेश में भी एक सीट खाली हो रही है वहां से भेज सकते हैं। अभी हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में कांग्रेस को एक एक सीट पक्के तौर पर मिल सकती है। वहां से खेड़ा को भेजा जा सकता है लेकिन कांग्रेस उनको तमिलनाडु ले जाना चाहती है। देखते हैं स्टालिन उनके नाम पर तैयार होते हैं या नहीं?
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