सरकार अपने जिस एजेंडे को लागू करने में किसी भी कारण से विफल हो जाती है उसके बारे में कहा जाता है कि विपक्ष ने और खास कर कांग्रेस ने नहीं करने दिया। दूसरी प्रादेशिक पार्टियों पर भी ठीकरा फोड़ा जाता है। हैरानी की बात है कि सरकार इतनी शक्तिशाली है, जिसने तमाम विवादित मुद्दों का निपटारा कर दिया। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 समाप्त करा दिया। जम्मू कश्मीर का बंटवारा भी करा दिया। नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए पास करा लिया। तीन तलाक को अपराध बनाने का कानून भी पास करा लिया। इस तरह के अनगिनत काम हुए, जिनके बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दावा करते हैं कि उनके सिवा कोई और नहीं करा सकता था। लेकिन महिला आरक्षण लागू करने का कानून नहीं बना। सितंबर 2023 में एक कानून बना भी तो वह पोस्ट डेटेड चेक की तरह है। देश में घुसपैठ नहीं रूकी और भाजपा आज तक इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। हिंदुओं के ऊपर मंडरा रहा खतरा टला नहीं है, बल्कि और बढ़ गया है।
बहरहाल, यह तरीका विकसित हो गया है कि जो कराना था वह करा लिया और जो नहीं कराना था या जिसमें विफल रहे उसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया। संसद में नारी शक्ति वंदन कानून का संशोधन विधेयक नहीं पास हुआ तो उसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम 29 मिनट का संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने 58 बार कांग्रेस का नाम लिया। यानी प्रति मिनट दो बार कांग्रेस का नाम लिया।
सोचें, लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार गठन का रिकॉर्ड बनाने का क्या फायदा, जब इतनी कमजोर कांग्रेस आपको काम नहीं करने दे और आप देश के सामने एक मिनट में दो बार उसका नाम लेकर उसे कोसें! यही हाल घुसपैठ का है। 12 साल सरकार में होने के बावजूद न घुसपैठ रूकी और न घुसपैठिए देश से निकाले गए तो उसका ठीकरा ममता बनर्जी पर फोड़ दिया कि उन्होंने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं दी। सोचें, भाजपा के शीर्ष नेता ऐसे तर्क देते हैं और समझते हैं कि जनता इन पर यकीन भी करती है।


